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West Asia: नेतन्याहू बोले- गाजा-लेबनान-सीरिया में तैनात रहेगी IDF; ट्रंप ने समझौते को बताया शक्तिशाली दस्तावेज
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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 16 Jun 2026 07:12 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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लाइव अपडेट
07:12 AM, 16-Jun-2026
फलस्तीन और ओआईसी ने सोमालीलैंड की आलोचना की
फलस्तीन और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने यरूशलम में सोमालीलैंड के दूतावास खुलने की निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का 'स्पष्ट उल्लंघन' बताया है। यह मामला तब सामने आया, जब सोमालिया से अलग हुए क्षेत्र सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने सोमवार को अपने पहले इस्राइल दौरे के दौरान दूतावास का उद्घाटन किया।पिछले वर्ष दिसंबर में इस्राइल ने सोमालीलैंड को मान्यता दी थी, जिसकी अरब लीग, ओआईसी और अफ्रीकी संघ ने आलोचना की थी। दौरे के दौरान अब्दुल्लाही ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर एक संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किए।
02:04 AM, 16-Jun-2026
जल्द सार्वजनिक किया जाएगा समझौते का विवरण: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का पूरा विवरण जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने इसे 'बहुत शक्तिशाली दस्तावेज' बताया। यह बयान उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एवियन में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान दिया, जो जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित की गई थी।ट्रंप ने कहा कि दस्तावेज संभवतः औपचारिक हस्ताक्षर समारोह के बाद जारी किया जाएगा, जिसकी उम्मीद इस सप्ताह के अंत में की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि समझौता कब सार्वजनिक होगा, तो उन्होंने कहा कि इसे जल्द जारी किया जाएगा क्योंकि यह एक अहम दस्तावेज है।
इस बीच, सीएनएन के अनुसार एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि पूरा समझौता अगले 24 से 48 घंटों के भीतर सार्वजनिक कर दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की नीति पूरी पारदर्शिता रखने की है और दस्तावेज को सार्वजनिक रूप से जारी किया जाएगा।
02:04 AM, 16-Jun-2026
इस्राइल की सेना गाजा, लेबनान और सीरिया में तैनात रहेगी: नेतन्याहू
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इस्राइली सेना गाजा, लेबनान और सीरिया में 'जब तक जरूरत होगी, तब तक' तैनात रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया, जब कुछ घंटे पहले ही ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते की घोषणा की गई थी।एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने कहा, हमने इस्राइल के चारों ओर गहरे सुरक्षा क्षेत्र बनाए हैं। हमने यह गाजा, लेबनान और सीरिया में किया है। उन्होंने आगे कहा, और मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम अपने देश की सुरक्षा के लिए इन सुरक्षा क्षेत्रों में उतनी ही देर तक रहेंगे, जब तक आवश्यकता होगी।
02:04 AM, 16-Jun-2026
समझौते के बावजूद सतर्क स्थिति में ईरानी सेना: प्रवक्ता
ईरान की सेना ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौता लागू होने के बावजूद वह पूरी तरह सतर्क स्थिति में बनी रहेगी। ईरानी सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान सशस्त्र बलों की तैयारियों का स्तर पहले से भी अधिक बनाए रखने की योजना है।उन्होंने कहा कि समझौते की अवधि में देश अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगा। यह जानकारी ईरान की समाचार एजेंसी फार्स के हवाले से दी गई है। बयान में आगे कहा गया कि यदि दुश्मन इस समझौते या किसी सहमति का उल्लंघन करता है, तो ईरान तुरंत और सख्ती से क्षेत्र की सैन्य स्थिति को समझौते से पहले वाली स्थिति में वापस ले आएगा।
02:01 AM, 16-Jun-2026
West Asia: नेतन्याहू बोले- गाजा-लेबनान-सीरिया में तैनात रहेगी IDF; ट्रंप ने समझौते को बताया शक्तिशाली दस्तावेज
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों से समर्थन हासिल करने की उम्मीद के साथ जी7 शिखर सम्मेलन मेंपहुंचे हैं। हालांकि उनके रवैये को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि वह पूरी तरह सहयोगी भावना से बातचीत करेंगे या नहीं।रासमुसेन कंसल्टेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के पूर्व नीति योजनाकार फैब्रिस पोथियर के अनुसार, ट्रंप के पास ईरान युद्ध को लेकर किसी तरह का राजनीतिक समाधान मौजूद है, इसलिए वह अब यूरोपीय और जी7 देशों का पूरा समर्थन चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाह सकता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए खुला रखने में उसे परिचालन स्तर पर भी सहयोग मिले।
पोथियर ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि यह स्थिति जी7 देशों और अमेरिका के बीच पिछले छह महीनों से चले आ रहे तनाव के बाद संबंधों में सुधार का मौका बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप के पास जी7 में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह सहयोगी भावना से काम करेंगे या यह स्वीकार करेंगे कि यूरोपीय सहयोगी और अन्य जी7 देश उस युद्ध में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं, जिसे बिना उन्हें पूरी जानकारी दिए शुरू किया गया था।