{"_id":"6a166772887aeed1df07184b","slug":"supreme-court-to-deliver-verdict-on-pleas-challenging-sir-of-electoral-rolls-updates-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"SIR: मतदाता सूची पुनरीक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, याचिकाओं में एसआईआर को दी गई है चुनौती","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SIR: मतदाता सूची पुनरीक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, याचिकाओं में एसआईआर को दी गई है चुनौती
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 27 May 2026 09:09 AM IST
विज्ञापन
एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुना सकता है। याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर करने की शक्ति को चुनौती दी गई है। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और क्यों इस पर विवाद है...
सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर के खिलाफ याचिकाओँ पर फैसला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट आज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुना सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस साल की शुरुआत में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत बुधवार को अपना फैसला सुनाएगी।
याचिका में उठाए गए हैं ये सवाल
याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर अभियान की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों के तहत नहीं आती है। विवाद का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की वह शर्त है, जिसके तहत जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें ऐसे व्यक्ति से पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उन सूचियों में दर्ज था।
गरीब और प्रवासियों के मताधिकार पर खतरे का दावा
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मतदान अधिकार से वंचित कर सकती है, क्योंकि उनके पास पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा दस्तावेजी प्रमाण मिलना मुश्किल है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावित मतदाताओं को राहत देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश भी जारी किए थे। शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
चुनाव आयोग क्यों मानता है एसआईआर को जरूरी?
अधिकांश याचिकाएं पिछले साल जून में दाखिल की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर अभियान शुरू करने का फैसला लिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाए रखने तथा फर्जी या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिका में उठाए गए हैं ये सवाल
याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर अभियान की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों के तहत नहीं आती है। विवाद का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की वह शर्त है, जिसके तहत जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उन्हें ऐसे व्यक्ति से पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उन सूचियों में दर्ज था।
विज्ञापन
विज्ञापन
गरीब और प्रवासियों के मताधिकार पर खतरे का दावा
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यह शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मतदान अधिकार से वंचित कर सकती है, क्योंकि उनके पास पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा दस्तावेजी प्रमाण मिलना मुश्किल है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावित मतदाताओं को राहत देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश भी जारी किए थे। शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।
Trending Videos
चुनाव आयोग क्यों मानता है एसआईआर को जरूरी?
अधिकांश याचिकाएं पिछले साल जून में दाखिल की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर अभियान शुरू करने का फैसला लिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाए रखने तथा फर्जी या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए यह अभियान जरूरी है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।