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पंचायती राज: 17.5 लाख पुरुष प्रतिनिधि पढ़ेंगे महिला सुरक्षा का पाठ, निर्भया फंड से 752 करोड़ किए जाएंगे खर्च
उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 18 Jun 2026 05:28 AM IST
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पंचायती राज मंत्रालय ने महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए देशव्यापी 'निर्भय चेतना' कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत करीब 32 लाख पंचायत प्रतिनिधियों को जागरूक और प्रशिक्षित करने की योजना है। इस पहल में पुरुषों को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ महिला प्रतिनिधियों को कानूनी साक्षरता और क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पढ़िए रिपोर्ट-
निर्भय चेतना कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने महिला सुरक्षा व लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों पर पुरुषों को संवेदनशील बनाने के लिए देशव्यापी ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम शुरू किया है।
केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि इस पहल के तहत 17.5 लाख पुरुष और 14.5 लाख महिला निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों समेत करीब 32 लाख जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने की तैयारी है। यह अपनी तरह का दुनिया का सबसे बड़ा अभियान बताया जा रहा है, जो निर्भया फंड के तहत संचालित लैंगिक समानता कार्यक्रम ‘निर्भय रहो’ का प्रमुख घटक है। इसके लिए महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण पर 343.43 करोड़ रुपये और पुरुषों के संवेदीकरण पर 408.83 करोड़ रुपये सहित कुल 752.26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्रालय का मानना है कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। इसके तहत देश की प्रत्येक पंचायत में पुरुषों में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाने, महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने और गांवों में सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर काम किया जाएगा।
14.5 लाख महिला प्रतिनिधियों को कानूनी साक्षरता का प्रशिक्षण
‘निर्भय नेत्री’ पहल के तहत 14.5 लाख से अधिक महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को कानूनी साक्षरता और क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की बेहतर समझ के साथ स्थानीय शासन में प्रभावी भूमिका निभा सकें। वहीं, ‘निर्भय दृष्टि’ पहल के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गांवों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सकेगा। पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा, महिला सुरक्षा जमीनी शासन और समुदाय से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए महिलाओं व पुरुषों दोनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
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तैयार किए जा रहे 28,500 मास्टर ट्रेनर...
इस कार्यक्रम के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं। पंचायती राज मंत्रालय निर्भया फंड परियोजना के अंतर्गत 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
ये भी पढ़ें: मानव विशेषज्ञों ने बनाई बढ़त: एआई मॉडल्स को दिए गए अनदेखे गणितीय प्रश्न, कई का समाधान नहीं खोज सके सिस्टम
निर्भय चेतना, निर्भय नेत्री और निर्भय दृष्टि
देश की लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतों, 6,500 से अधिक ब्लॉक पंचायतों और 692 से अधिक जिला पंचायतों में तीन प्रमुख मोर्चों पर काम किया जाएगा। ‘निर्भय चेतना’ अभियान के तहत 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता, महिला अधिकारों, सुरक्षा और महिला-अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महिलाओं को अधिक सुरक्षा व राहत देने के लिए कानूनों को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि, भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी कई विकसित देशों की तुलना में अब भी कम है। चीन में महिलाओं की भागीदारी लेबर फोर्स में 59 फीसदी है व भारत में यह सिर्फ 32 फीसदी है। जब तक महिलाएं सुरक्षित नहीं होंगी विकास नहीं होगा। -विवेक भारद्वाज, केंद्रीय सचिव, पंचायती राज
केंद्रीय पंचायती राज सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि इस पहल के तहत 17.5 लाख पुरुष और 14.5 लाख महिला निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों समेत करीब 32 लाख जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने की तैयारी है। यह अपनी तरह का दुनिया का सबसे बड़ा अभियान बताया जा रहा है, जो निर्भया फंड के तहत संचालित लैंगिक समानता कार्यक्रम ‘निर्भय रहो’ का प्रमुख घटक है। इसके लिए महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण पर 343.43 करोड़ रुपये और पुरुषों के संवेदीकरण पर 408.83 करोड़ रुपये सहित कुल 752.26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्रालय का मानना है कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। इसके तहत देश की प्रत्येक पंचायत में पुरुषों में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाने, महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने और गांवों में सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर काम किया जाएगा।
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14.5 लाख महिला प्रतिनिधियों को कानूनी साक्षरता का प्रशिक्षण
‘निर्भय नेत्री’ पहल के तहत 14.5 लाख से अधिक महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को कानूनी साक्षरता और क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की बेहतर समझ के साथ स्थानीय शासन में प्रभावी भूमिका निभा सकें। वहीं, ‘निर्भय दृष्टि’ पहल के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गांवों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सकेगा। पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा, महिला सुरक्षा जमीनी शासन और समुदाय से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए महिलाओं व पुरुषों दोनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
तैयार किए जा रहे 28,500 मास्टर ट्रेनर...
इस कार्यक्रम के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं। पंचायती राज मंत्रालय निर्भया फंड परियोजना के अंतर्गत 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
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निर्भय चेतना, निर्भय नेत्री और निर्भय दृष्टि
देश की लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतों, 6,500 से अधिक ब्लॉक पंचायतों और 692 से अधिक जिला पंचायतों में तीन प्रमुख मोर्चों पर काम किया जाएगा। ‘निर्भय चेतना’ अभियान के तहत 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता, महिला अधिकारों, सुरक्षा और महिला-अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महिलाओं को अधिक सुरक्षा व राहत देने के लिए कानूनों को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि, भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी कई विकसित देशों की तुलना में अब भी कम है। चीन में महिलाओं की भागीदारी लेबर फोर्स में 59 फीसदी है व भारत में यह सिर्फ 32 फीसदी है। जब तक महिलाएं सुरक्षित नहीं होंगी विकास नहीं होगा। -विवेक भारद्वाज, केंद्रीय सचिव, पंचायती राज