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नीट-यूजी : टेलीग्राम संगठित अपराध का केंद्र, कई देश लगा चुके हैं रोक; एजेंसियों की पहुंच से दूर करता है काम

ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 18 Jun 2026 05:07 AM IST
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सार
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार टेलीग्राम एप संगठित अपराध का बड़ा केंद्र बन गया है, जहां अंतरराष्ट्रीय गिरोह डेटा चोरी, फर्जी फ्रॉड टूल्स और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों से अरबों डॉलर की कमाई कर रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से कानूनी अनुरोधों की अनदेखी और जवाबदेही की कमी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, जबकि स्कैमर्स ने मैसेज एडिट फीचर जैसी खामियों का इस्तेमाल कर फर्जी पेपर और परीक्षा से जुड़े धोखाधड़ी वाले रैकेट चलाए हैं। भारत समेत कई देशों में इसे रोकने या नियंत्रित करने की कोशिशें की गई हैं, लेकिन नए चैनल लगातार सामने आते रहे हैं, जिससे यह चुनौती और बढ़ती जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-

neet ug telegram faces concerns unanswered legal cases and lack of cooperation
Telegram App - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय का दावा है कि टेलीग्राम एप संगठित आपराधिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन चुका है। इस पर ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय हैं, जो डाटा चोरी, फेक फ्रॉड टूल्स व मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये सालाना 27-36 अरब डॉलर कमाते हैं।


टेलीग्राम का एक दशक से भी ज्यादा समय का रिकॉर्ड रहा है कि यह बिना किसी देश के अधिकार क्षेत्र में आए एजेंसियों की पहुंच से दूर रहकर काम करता रहा है। चिंता की बात है कि टेलीग्राम ने 2013 और 2024 के बीच दुनियाभर में 2,460 कानूनी अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया। भारत से पहले भी कई देश इस पर रोक लगा चुके हैं।
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इसलिए मैसेज एडिट सुविधा पर भी रोक
टेलीग्राम एप एडमिन को किसी भी पुराने मैसेज को एडिट करने और उसका कंटेंट पूरी तरह बदलने की सुविधा देता है, जबकि दिखने वाले टाइमस्टैम्प वही रहता है। यानी 4 जून को एडिट किए गए मैसेज को ऐसा दिखाया जा सकता है, जैसे वह एक जून को भेजा गया है। स्कैमर्स ने इसी खामी का फायदा उठाकर छात्रों एवं अभिभावकों से पैसे ऐंठे।
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पैसे मिलते ही स्कैमर्स गायब
  •  ’पेपर लीक्ड नीट’ और ‘री-नीट 2026’ जैसे नाम वाले टेलीग्राम चैनल खुलेआम 22 लाख छात्रों के खिलाफ जबरन वसूली रैकेट चला रहे थे।14000-25000 रुपये तक वसूल रहे थे स्कैमर्स छात्रों से नकली पेपर के लिए कुछ मामलों  में मांगी गई रकम 10 लाख रुपये तक थी। पैसा मिलते ही स्कैमर्स गायब हो जाते थे।
  • ऐसे मामले वित्तीय धोखाधड़ी जैसे हैं, जिसे सामग्री की निगरानी (कंटेंट मॉडरेशन) से नियंत्रित करना संभव नहीं है।

कुकरमुत्ते की तरह उग आते हैं टेलीग्राम जैसे चैनल
  • भारत ने इन चैनलों को एक-एक करके हटाने की कोशिश की। लेकिन, पुराने चैनलों के हटने से ज्यादा तेजी से नए चैनल सामने आ जाते थे।
  • भारत में टेलीग्राम का कोई रजिस्टर्ड ऑफिस नहीं है। कोई शिकायत अधिकारी नहीं है और भारतीय कानून के तहत कोई कानूनी जवाबदेही की प्रणाली भी नहीं है।

ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

वियतनाम ने किया था ब्लॉक
  • टेलीग्राम के खिलाफ ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि अहम सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान चैनल पर अस्थायी रोक लगा दिया जाता है।
  • वियतनाम ने 2025 में टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था। वहां की पुलिस को पता चला कि देश में चल रहे 68 फीसदी टेलीग्राम चैनल और ग्रुप कानून का उल्लंघन कर रहे थे। इनमें धोखाधड़ी,ड्रग तस्करी और आतंकवाद जैसे मामले शामिल थे।
  • केन्या ने राष्ट्रीय परीक्षाओं के दौरान तीन सप्ताह तक टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था।
  • अल्जीरिया, सीरिया और जॉर्डन ने हाई स्कूल डिप्लोमा परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है।

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भारत में बैन की कोशिशों के पीछे हो सकती है रिलायंस : टेलीग्राम
टेलीग्राम एप के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पावेल डुरोव ने आरोप लगाया कि भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को बैन करने की कोशिशों में रिलायंस शामिल हो सकती है।

डुरोव ने रिलायंस से जुड़ी एक कंपनी पर देश के बाहर टेलीग्राम के इंटरनेट एक्सेस में रुकावट डालने का भी आरोप लगाया। हालांकि, इंडस्ट्री के एक सूत्र ने इन दावों को फेक न्यूज बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि यह रिलायंस ग्रुप की दो अलग-अलग कंपनियों के बीच गलतफहमी का नतीजा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में डुरोव ने आरोप लगाया कि भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटर रिलायंस, बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (बीजीपी) हाइजैकिंग नाम की तकनीक के जरिए भारत के बाहर (जैसे यूएई में) लाखों यूजर्स के लिए टेलीग्राम तक पहुंच में रुकावट डाल रही है। डुरोव ने लिखा, यह रुकावट जानबूझकर डाली जा रही लगती है। यह प्रतिस्पर्धा की लड़ाई का हिस्सा हो सकता है। 

डुरोव को समझने में गलती हुईः सूत्र
टेलीकॉम उद्योग के सूत्र ने कहा कि डुरोव ने दो  कंपनियों, रिलायंस कम्युनिकेशन्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम शाखा जियो को आपस में मिला दिया है। डुरोव ने बीजीपी-राउटिंग समस्या में जिस ऑटोनॉमस सिस्टम नंबर का उल्लेख किया वह रिलायंस कम्युनिकेशन्स का है, और रिलायंस कम्युनिकेशन्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. का हिस्सा नहीं है।
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