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नासिक टीसीएस कांड: आठ और केस में एसआईटी की चार्जशीट दाखिल, AIMIM पार्षद पर कसा शिकंजा; कई बड़े नाम शामिल
पीटीआई, नासिक।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 28 May 2026 11:47 PM IST
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नासिक की अदालत में एसआईटी ने मुंबई नाका पुलिस स्टेशन की आठ एफआईआर के आधार पर दूसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कई लोग नामजद हैं। इससे पहले देवलाली कैंप थाने के मामले में 22 मई को 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
नासिक टीसीएस कांड
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टीसीएस के नासिक केंद्र में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के गंभीर मामले में जांच तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने कानूनी मोर्चे पर बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी ने गुरुवार को नासिक की एक अदालत में अपनी दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह पूरी कार्रवाई आईटी कंपनी की महिला कर्मचारियों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद की जा रही है।
मुंबई नाका पुलिस स्टेशन की आठ एफआईआर पर कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह नई चार्जशीट नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज आठ अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) से जुड़ी हुई है। एसआईटी ने इस आरोप पत्र को एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। इस चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कई आरोपियों को नामजद किया गया है। आरोपियों में रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसीफ बिलाल अत्तार, शफी भीकन शेख, दानिश एजाज शेख और निदा एजाज खान समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: नासिक टीसीएस उत्पीड़न मामला: एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल को समन जारी, निदा खान की मदद करने का आरोप
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देवलाली कैंप मामले में पहले ही दाखिल हो चुका है बड़ा आरोप पत्र
एसआईटी ने 22 मई को एक और बड़ी कामयाबी हासिल की थी। जांच टीम ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अकेले मामले में करीब 1500 पन्नों की बेहद विस्तृत चार्जशीट अदालत में सौंपी थी। उस मामले में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और मतीन मजीद पटेल को आरोपी बनाया गया है। इस कार्रवाई में भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी और एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बनाया जाता था दबाव
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नासिक स्थित आईटी कंपनी की कई महिला कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर गंभीर शोषण के आरोप लगाए। महिलाओं का आरोप था कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके साथ ही उनका यौन उत्पीड़न करने और जबरन धर्म बदलवाने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने खुलासा किया कि आरोपी कर्मचारियों को निशाना बनाने के लिए एक खास व्हाट्सएप ग्रुप चलाते थे। इस ग्रुप के माध्यम से उन पर धार्मिक प्रार्थना करने और मांसाहारी भोजन खाने का लगातार दबाव बनाया जाता था। कुछ पीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जबरन खास धार्मिक प्रथाओं को अपनाने, खान-पान की आदतें बदलने और धार्मिक प्रतीकों को धारण करने के लिए विवश किया जाता था।
एआईएमआईएम कॉर्पोरेटर से 9 घंटे तक पूछताछ
इस मामले के तार अब राजनीतिक गलियारों से भी जुड़ते दिख रहे हैं। पुलिस अब उन लोगों पर शिकंजा कस रही है जिन्होंने आरोपियों को छिपने में मदद की। इसी सिलसिले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के कॉर्पोरेटर मतीन पटेल से पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछताछ की है। मतीन पटेल पर आरोप है कि उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग रही मुख्य आरोपी निदा खान को अपने यहां पनाह दी थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि 25 मई को मतीन पटेल से थाने में करीब नौ घंटे तक गहन पूछताछ की गई। पुलिस ने इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए उन्हें आगामी 1 जून को दोबारा पुलिस स्टेशन में हाजिर होने का समन जारी किया है।
मुंबई नाका पुलिस स्टेशन की आठ एफआईआर पर कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह नई चार्जशीट नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज आठ अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) से जुड़ी हुई है। एसआईटी ने इस आरोप पत्र को एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। इस चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कई आरोपियों को नामजद किया गया है। आरोपियों में रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसीफ बिलाल अत्तार, शफी भीकन शेख, दानिश एजाज शेख और निदा एजाज खान समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
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एसआईटी ने 22 मई को एक और बड़ी कामयाबी हासिल की थी। जांच टीम ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अकेले मामले में करीब 1500 पन्नों की बेहद विस्तृत चार्जशीट अदालत में सौंपी थी। उस मामले में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और मतीन मजीद पटेल को आरोपी बनाया गया है। इस कार्रवाई में भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी और एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बनाया जाता था दबाव
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नासिक स्थित आईटी कंपनी की कई महिला कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर गंभीर शोषण के आरोप लगाए। महिलाओं का आरोप था कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके साथ ही उनका यौन उत्पीड़न करने और जबरन धर्म बदलवाने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने खुलासा किया कि आरोपी कर्मचारियों को निशाना बनाने के लिए एक खास व्हाट्सएप ग्रुप चलाते थे। इस ग्रुप के माध्यम से उन पर धार्मिक प्रार्थना करने और मांसाहारी भोजन खाने का लगातार दबाव बनाया जाता था। कुछ पीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जबरन खास धार्मिक प्रथाओं को अपनाने, खान-पान की आदतें बदलने और धार्मिक प्रतीकों को धारण करने के लिए विवश किया जाता था।
एआईएमआईएम कॉर्पोरेटर से 9 घंटे तक पूछताछ
इस मामले के तार अब राजनीतिक गलियारों से भी जुड़ते दिख रहे हैं। पुलिस अब उन लोगों पर शिकंजा कस रही है जिन्होंने आरोपियों को छिपने में मदद की। इसी सिलसिले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के कॉर्पोरेटर मतीन पटेल से पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछताछ की है। मतीन पटेल पर आरोप है कि उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग रही मुख्य आरोपी निदा खान को अपने यहां पनाह दी थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि 25 मई को मतीन पटेल से थाने में करीब नौ घंटे तक गहन पूछताछ की गई। पुलिस ने इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए उन्हें आगामी 1 जून को दोबारा पुलिस स्टेशन में हाजिर होने का समन जारी किया है।