एसओजी रिश्वत कांड: एटीएम हैकरों से डिवाइस लेकर दूसरे गैंग से कराई हैकिंग, मेवाती गैंग से भी जुड़े हैं आरोपी पुलिसवालों के तार
आशंका जताई जा रही है कि इस डिवाइस को आरोपियों ने अन्य गिरोह को दे दिया और कई एटीएम से पैसे निकलवा लिए। इसमें एक सिपाही की भूमिका सबसे संदिग्ध है जो हत्या का आरोपी भी रह चुका है।
विस्तार
बीस लाख व क्रेटा लेकर एटीएम हैक कर रुपये निकालने वाले बदमाशों को छोड़ने के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। गाजियाबाद के इंदिरापुरम में गिरफ्तार किए गए बदमाशों ने पूछताछ में यह जानकारी दी है कि नोएडा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने अगस्त में जब उन्हें छोड़ा था तो एटीएम हैक करने की अत्याधुनिक डिवाइस भी ले ली थी।
ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस डिवाइस को आरोपियों ने अन्य गिरोह को दे दिया और कई एटीएम से पैसे निकलवा लिए। इसमें एक सिपाही की भूमिका सबसे संदिग्ध है जो हत्या का आरोपी भी रह चुका है। इसकी तैनाती एक पड़ोसी जिले में है। इसी सिपाही के जरिये घेरे में आई एसओजी का मेवात के गिरोह से लेकर अन्य से साठगांठ हुई थी।
अब कमिश्नरेट पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस इस मामले में यह पता लगा रही है कि इस तरह के डिवाइस से अगस्त में नोएडा सहित एनसीआर, यूपी, हरियाणा, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में कहां-कहां रुपये निकाले गए और इसमें किस गिरोह का हाथ था जांच के यह काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगा कि इसमें नोएडा एसओजी के पुलिसकर्मियों का कितना सहयोग था।
सेल टैक्स में लगा था सरकारी सूमो चुराने का आरोप
पुलिस के अनुसार, बर्खास्त सिपाही अमरीश यादव पहले सेल टैक्स में रह चुका है। जांच में पता चला है कि सेल टैक्स में रहने के दौरान उस पर सरकारी कार चुराने का आरोप लगा था। सरकारी सूमो पर नीली बत्ती लगाकर वह उगाही करता था। सूमो चोरी के मामले में उसका एक रिश्तेदार गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद वह सेल टैक्स से पुलिस विभाग आ गया।
खोड़ा से लेकर नोएडा-ग्रेनो तक संपत्ति की चर्चा
पुलिस कमिश्नर ने बर्खास्त पुलिसकर्मियों सहित अन्य की संपत्ति की जांच के आदेश दिए हैं। चर्चा है कि इनमें से कुछ पुलिसकर्मियों ने कई जगहों पर संपत्ति अर्जित की है। खोड़ा में तीन मकान, गाजियाबाद में एक करोड़ का फ्लैट, सेक्टर-18 में बेसमेंट, सेक्टर-105 व ग्रेटर नोएडा में मकान व संपत्ति होने की चर्चा है।
तीन जगह रिश्वत के पैसे बंटने की चर्चा
नोएडा एसओजी की टीम ने बदमाशों को छोड़ने के एवज में बीस लाख रुपये थे जो पुलिस महकमे में तीन हिस्सों में बंटे थे। अगस्त में हिरासत में लेकर बदमाशों से जब नोएडा में पूछताछ की जा रही थी तो वहां सादे कपड़े में अधिकारी बनकर एक शख्स आया था। क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे राजपत्रित अधिकारी होने के बारे में बताया था। हालांकि, वह राजपत्रित अधिकारी था या कोई और इसकी जांच चल रही है। बताया जा रहा है कि इस शख्स, एसओजी प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों में बंटे थे।
एसओजी टीम में रहे सभी पुलिसकर्मियों की जांच की जा रही है। इस टीम के सदस्यों की गिरोह से संबंधों की भी गहनता से जांच की जा रही है। सभी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।- आलोक सिंह, पुलिस कमिश्नर