बेटा बोला- छुट्टी न मिलने से पिता मुझसे मिलकर लौट रहे थे
हादसे में जान गंवाने वाले सुरेश कुमार जायसवाल गोरखपुर में ही ग्रॉसरी का काम करते थे। बेटे अभिषेक ने बताया कि वह दिल्ली में कंप्यूटर ऑपरेटर है। छुट्टी न मिलने के कारण पिता उससे मिलने दिल्ली गए थे। सोमवार सुबह पहुंचे थे। पूरे दिन मेरे साथ रहने के बाद शाम को बस में घर आने के लिए बैठ गए थे। बताया कि करीब दो साल पहले मां पूनम देवी की बीमारी से मौत हो गई थी।
Unnao Road Accident
- फोटो : amar ujala
क्या पता था अब कभी नहीं मिलेंगे
पिता ही मेरे साथ छोटे भाई आदित्य और कृष्णा का भी ध्यान रखते थे। बताया कि पापा बोलकर गए थे, जब मन न लगे तो आ जाना, या मुझे बता देना मिलने आ जाऊंगा। लेकिन यह नहीं पता था कि अब वह कभी नहीं मिलेंगे। यह बताते हुए वह फोन पर ही तेज-तेज से रोने लगा। बोला पहले मां ने साथ छोड़ा और पिता हमेशा के लिए छोड़कर चले गए।
आंखों के सामने पति की मौत, बिंद्रावती बदहवास
हादसे का शिकार हुए विदेशी गुप्ता परिवार सहित दिल्ली में रहते हैं। उनके दोस्त शिवम ने बताया कि वह प्राइवेट नौकरी करते थे। बस में वह पत्नी बिंद्रावती के साथ अपने घर गोरखपुर आ रहे थे। हादसे में विदेशी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी को अधिक चोट नहीं आई थी।
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समय पर इलाज होता तो बच जाती जान
आंखों के सामने पति की मौत से वह बेहाल हैं। सीएचसी में वह बेहोश हो गईं। पानी की छीटें डालने के बाद वह होश में आईं। बिंद्रावती ने आरोप लगाया कि कि सीएचसी में समय पर इलाज होता तो शायद मेरे पति की जान बच जाती। घटना के समय तीनों बच्चे घर पर थे। मौत की सूचना पहुंचने के बाद सभी घर के लिए निकले हैं।
पापा कहते थे दो साल बाद सेवानिवृत्त होकर रहेंगे साथ
एक्सप्रेसवे पर हुई घटना में जान गंवाने वाले बिहार सीवान के महाराजगंज मछुआरी निवासी उपनिरीक्षक रवीचरन पुलिस लाइन में तैनात थे। बेटे राजू कुमार ने बताया कि पिता के सेवानिवृत्त होने के दो साल बचे थे। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने साथ रहने और फिर घूमने की बात कही थी।
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बंदी को लेकर जा रहे थे गुड़गांव
लेकिन यह नहीं पता था कि बीच रास्ते में ही हम लोगों को छोड़कर चले जाएंगे। जाते समय यह बताया था कि एक बंदी को लेकर गुड़गांव जा रहे हैं। उनके साथ कांस्टेबल मो. वसीम और रोधन कुमार भी गए थे। वह भी घायल हुए हैं। पति की मौत से पत्नी कांती देवी, बच्चों में तीन बेटे और दो बेटी बेहाल हैं।
आठ महीने बाद परिजनों मिलने जा रहे थे दिनेश, रास्ते में मौत
बस पलटने से जान गंवाने वाले दिनेशचंद्र चतुर्वेदी दिल्ली में रहकर प्राइवेट नौकरी करते थे। लखनऊ निवासी उनके साले आशीष पांडेय ने बताया कि जीजा दिवाली पर घर आए थे। तब से अब अपने घर गोंडा के श्रृंगारधार मासकनवा जा रहे थे। पत्नी मिथलेश और बच्चों में सोनल, प्रियल, अंशिका और अन्नू पिता के आने की राह देख रही थीं। मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची कोहराम मच गया। बेटियां बार-बार बेहोश हो रही थीं। दिनेशचंद्र ही अपने परिवार के सहारा थे।
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दिव्यांग सरकारी कर्मचारी की हत्या में दो साल से जेल में था
हादसे का शिकार हुआ गुड़गांव निवासी तोमर उर्फ चंद्रपाल पेशे से डॉक्टर था। लेकिन आचरण अच्छे न होने से पत्नी अमरजीत कौर ने 15 साल पहले ही तलाक ले लिया था। तलाक में दो बच्चे निशिका और निशांक मां के पास ही रहने का आदेश हुआ था। इस पर तोमर उर्फ चंद्रपाल अकेला हो गया था और इधर-उधर जाकर रहने लगा था।
हत्या क्यों की थी, यही नहीं पता
अमरजीत कौर ने बताया कि करीब दो साल पहले पता चला कि उसने गोरखपुर में किसी दिव्यांग सरकारी कर्मचारी की हत्या कर दी है। हत्या करने के बाद वहां से भागकर मुझे भी मारने आए थे। लेकिन सफल नहीं हुए थे। पत्नी के मुताबिक उसने ही पति को गुड़गांव के सेक्टर पांच थाने में पकड़वाया था। तब से वह जेल में हैं। हत्या क्यों की थी, यही नहीं पता। मंगलवार सुबह मेरे पास उनकी मौत की खबर आई।
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परिवार वाले शादी के लिए देख रहे थे रिश्ता
बस पलटने से हुई सेरसहन गोविंदपारा निवासी विजय कुमार की मौत की घटना में बड़े भाई अजय कुमार ने बताया कि विजय दिल्ली के आर्मी कैंप के पास सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। पांच महीने पहले घर से गया था, तब से वहीं था। सोमवार को घर आने के लिए बस में बैठा था, तब फोन कर बताया था। बेटे की मौत से मां सिरजना देवी सहित अन्य परिजन बेहाल हैं। बताया कि अभी शादी नहीं हुई थी।