पॉलीटेक्निक की सम सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियां किसी से छुपी नहीं हैं। ‘अमर उजाला’ ने लगातार खबरें प्रकाशित कर इन खामियों को उजागर किया। इसी का नतीजा रहा कि हाईटेक तरीके से नकल करने वाले छात्रों को तकनीक के सहारे ही मात दी जा रही है। विभाग ने ऑनलाइन परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर नजर रखने की तकनीक में बदलाव किया तो नकलची छात्रों की शामत आ गई है। वे अब फंसते जा रहे हैं।
पॉलीटेक्निक की परीक्षाएं गत 18 अगस्त से ऑनलाइन आयोजित की जा रही हैं। छात्र घर बैठे मोबाइल और लैपटॉप से परीक्षा दे रहे हैं। मगर आए दिन सामूहिक नकल की शिकायतें आ रही हैं। परीक्षा के दौरान ही प्रश्न और उत्तर के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगते हैं। इसके बाद विभाग ने मॉनिटरिंग के तरीके और तकनीकी में थोड़ा बदलाव किया है। अब परीक्षा के दौरान छात्रों से लाइव चैट की जाती है। संदिग्ध लगने वाले छात्रों से प्रॉक्टर से लेकर नोडल अधिकारी तक रैंडम लाइव चैट कर स्थिति का जायजा लेते हैं। उन्हें वॉर्निंग भी दी जाती है। लाइव स्क्रीनिंग के दौरान छात्र की पासपोर्ट साइज फोटे भी दर्शाई जाती है, ताकि कोई भी उसका मिलान कर सके।
रूम का भी होता है स्कैन
संदिग्ध छात्रों को लैपटॉप व मोबाइल घुमाकर अपने कमरे की स्थिति दर्शाने को कहा जाता है। यदि फिर भी उसके क्रियाकलाप संदिग्ध लगते हैं तो पांच मिनट के लिए उसे परीक्षा से रोक दिया जाता है। बार-बार संदिग्ध पाए जाने पर उसे नकल की श्रेणी में डाल दिया जाता है। यही नहीं प्रॉक्टर पर भी नजर रखी जा रही है। उन्होंने कितने छात्रों को कितनी बार चेतावनी दी गई, इसका रोज रिकॉर्ड रखा जा रहा है। यदि किसी प्रॉक्टर ने कम कार्रवाई की है तो उसे भी चेतावनी दी जाती है। प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव सुनील सोनकर ने बताया कि चैट के माध्यम से लिखित में छात्रों को चेतावनी दी जाती है। परीक्षा की मॉनिटरिंग के लिए कुल 996 प्रॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। अब तक करीब ढाई हजार से ज्यादा नकलची छात्र पकड़े जा चुके हैं।