सड़क हादसों में कमी लाने व सड़क सुरक्षा उपायों को अपनाने के लिए राज्य सरकार ने सूबे में सड़क सुरक्षा नीति लागू कर दी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को इसे लागू कर दिया। इसके साथ ही यूपी देश का पहला ऐसा प्रदेश बन गया है जिसने सबसे पहले इस नीति को लागू किया है।
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इसके तहत चार विभाग परिवहन, गृह, पीडब्ल्यूडी व स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे। उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 36 हजार लोगों की मृत्यु सड़क हादसों में होती है। ज्यादातर हादसों में गलती ड्राइवर की होती है।
कई बार खराब सड़क भी दुर्घटना का कारण बनती है। ऐसे में समाज में जागरूकता लाकर व सड़क सुरक्षा के उपाय अपनाकर दुर्घटनाओं में कुछ कमी लाई जा सकती है। इन्हीं चीजों पर ‘राज्य सड़क सुरक्षा नीति’ में फोकस किया गया है। इसके लिए चार स्तर पर कमेटियां गठित की गई हैं।
सड़क सुरक्षा परिषद का गठन, सीएम अध्यक्ष
प्रदेश स्तर पर राज्य सड़क सुरक्षा परिषद का गठन किया गया है। खुद मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं। परिवहन मंत्री उपाध्यक्ष व प्रमुख सचिव परिवहन सदस्य सचिव होंगे। परिषद में कुल 29 लोग शामिल किए गए हैं।
परिषद के निर्णयों को लागू कराएगी उच्चस्तरीय समिति
राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के निर्णयों को लागू कराने के लिए सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित कर दी है। परिवहन आयुक्त इसके सदस्य सचिव बनाए गए हैं। इसमें अध्यक्ष सहित कुल 13 लोगों को शामिल किया गया है। इसमें कई विभागों के प्रमुख सचिव सदस्य बनाए गए हैं।
रोड सेफ्टी सेल और सड़क सुरक्षा समिति भी
परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में रोड सेफ्टी सेल का भी गठन किया गया है। इसमें हाई लेवल टेक्निकल टीम होगी। इसके साथ ही जिला स्तर पर डीएम के नेतृत्व में ‘सड़क सुरक्षा समिति’ गठित की जाएगी, जो जिले में सड़क सुरक्षा के तहत होने वाले कामों की निगरानी करेगी।
ये होगा सड़क सुरक्षा नीति का मकसद
-सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना
-सड़क सुरक्षा के उपायों के लिए कोष का गठन करना
-डेटा बेस की स्थापना
-सुरक्षित सड़कों का निर्माण कराना
-सड़कों पर सेफ ड्राइविंग सुनिश्चित कराना
-वाहन चालकों के ट्रेनिंग स्कूल खोलना
-लाइसेंस जारी करने से पहले ड्राइविंग की दक्षता का ठीक से मूल्यांकन
-शिक्षा, प्रशिक्षण व प्रचार के माध्यम से लोगों को जागरूक करना
-यातायात संबंधी कानूनों को ठीक से लागू कराना
-सड़क दुर्घटना में घायलों के लिए आपात चिकित्सीय सहायता
-सड़क सुरक्षा अनुसंधान पर विशेष ध्यान देना
इन विभागों की होगी जिम्मेदारी
परिवहन विभाग: सड़क सुरक्षा नीति का नोडल विभाग परिवहन विभाग है। नीति का पालन ठीक ढंग से कराना इसी विभाग की जिम्मेदारी होगी। लोगों में जागरूकता पैदा करने का काम भी यही विभाग करेगा।
लोक निर्माण विभाग: यह विभाग उन सड़कों को ठीक करेगा जहां सबसे अधिक हादसे होते हैं। दुर्घटना बहुल क्षेत्रों में साइन बोर्ड लगाने का काम भी विभाग का होगा। रोड सेफ्टी सेल की हरी झंडी के बाद ही अब पीडब्ल्यूडी सड़क बनाएगा।
गृह विभाग: हाईवे पर सड़क दुर्घटना होने पर पुलिस तत्काल मदद करेगी। हर 40 किलोमीटर की दूरी पर ट्रैफिक आउटपोस्ट बनाए जाएंगे। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों से पुलिस सख्ती से निपटेगी।
स्वास्थ्य विभाग: सड़क दुर्घटना होने पर तत्काल चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने का काम यह विभाग करेगा। इसके लिए ट्रॉमा सेंटर बनाए जाएंगे। दुर्घटना होने पर मरीज को एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने की व्यवस्था यही विभाग करेगा।