न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 08 Dec 2019 01:32 PM IST
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली कर्मचारियों के पीएफ भुगतान के संबंध में 23 नवंबर को जारी शासनादेश का गजट नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की है। समिति ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है। समिति ने पीएफ घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए पावर कॉर्पोरेशन के पूर्व अध्यक्षों की गिरफ्तारी की भी मांग की है।
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2 नवंबर को मुख्यमंत्री की घोषणा के एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी घोटाले की सीबीआई जांच शुरू न होने पर संघर्ष समिति ने रोष जताया है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि डीएचएफ एल के तत्कालीन रीजनल हेड की गिरफ्तारी से साफ हो गया है कि घोटाले में पावर कॉर्पोरेशन और डीएचएफ एल के शीर्ष अधिकारी इसमें शामिल हैं।
ऐसे में घोटाले की अवधि में जितने भी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन और एमडी रहे हैं, उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाना जरूरी है। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए संघर्ष समिति की 10 दिसंबर को यहां बैठक बुलाई गई है।
पावर कॉर्पोरेशन के तत्कालीन चेयरमैन दोषी
पदाधिकारियों ने कहा कि डीएचएफएल में निवेश करना ही गलत था, लेकिन निवेश एफडी में किया गया जो और भी असुरक्षित था। इसके लिए सबसे ज्यादा दोषी पावर कॉर्पोरेशन के तत्कालीन चेयरमैन हैं।
समिति के पदाधिकारियों शैलेंद्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पांडेय, सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद, शशिकांत श्रीवास्तव, विपिन प्रकाश वर्मा, डीके मिश्र, महेंद्र राय, पीएन तिवारी, मो. इलियास व पीएन राय ने साझा बयान में कहा कि बिजलीकर्मियों में भरोसा पैदा करने के लिए पीएफ भुगतान का गजट नोटिफिकेशन जारी करना जरूरी है।