भाजपा आलाकमान ने नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान दिल्ली की संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखने के साथ-साथ अगले वर्ष प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनाव को भी प्रमुख आधार बनाने पर विचार कर रहा है। इस कारण प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ऐसे नेताओं के नामों की सूची बनाई जा रही है जिनकी सामाजिक और राजनीतिक स्वीकार्यता दिल्ली के साथ-साथ पंजाब की राजनीति में भी भाजपा के लिए लाभकारी साबित हो सके।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, सांसद बांसुरी स्वराज, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और भाजपा नेता अरविंद सिंह लवली आदि नामों पर चर्चा कर रहा है। मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम इस सूची में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
सिरसा लंबे समय तक पंजाब की राजनीति और सिख संगठनों से जुड़े रहे हैं। अकाली दल बादल के साथ सक्रिय राजनीति करने के दौरान उन्होंने पंजाब और दिल्ली दोनों में प्रभाव बनाया। अकाली दल सरकार के समय भी वे महत्वपूर्ण भूमिका में रहे थे। वर्तमान में भाजपा संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे सिरसा को पार्टी के सिख चेहरे के रूप में देखा जाता है।
दूसरी ओर, अरविंद सिंह लवली का नाम भी लगातार चर्चा में है। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए लवली भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा में आने के समय उन्होंने अपने राजनीतिक सम्मान और भूमिका को लेकर स्पष्ट अपेक्षाएं रखी थीं। पार्टी ने भी उन्हें लगातार महत्व देने की कोशिश की है। दिल्ली की राजनीति में उनकी पहचान एक अनुभवी और अपेक्षाकृत सर्वस्वीकार्य नेता की रही है।
सांसद बांसुरी स्वराज का नाम भी चर्चाओं में तेजी से उभरा है। नई दिल्ली से सांसद बनने के बाद उन्होंने राजधानी में सक्रिय जनसंपर्क और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। भाजपा के भीतर उन्हें ऊर्जावान और प्रभावी वक्ता माना जाता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि उन्होंने सिख समुदाय के साथ लगातार संवाद बनाए रखा और विभिन्न अवसरों पर उनसे जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया है। पंजाब से सटे हरियाणा की रहने वाली बांसुरी की पंजाबी समाज के साथ बढ़ती सक्रियता को भी उनके पक्ष में देखा जा रहा है।
इसके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है। पंजाबी समुदाय से आने वाले मल्होत्रा लंबे समय से संगठन और चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पंजाब और दिल्ली के सामाजिक समीकरणों को देखते हुए उनके नाम को भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।