जोशीमठ-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर चौड़ीकरण कार्य के तहत हो रहे विस्फोटों से रैणी और लाता गांव के ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है। बीआरओ की ओर से हिल साइड के बोल्डरों को विस्फोट से उड़ाया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीआरओ द्वारा अनियंत्रित विस्फोट किए जा रहे हैं जिससे उनके आवासीय भवन तक हिल रहे हैं। ग्रामीणों ने बोल्डरों को तोड़ने के लिए साइलेंट विस्फोट करने की मांग उठाई है। नीती घाटी में स्थित मलारी हाईवे पर्यटन के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। घाटी में द्वितीय रक्षा पंक्ति के दर्जनों गांव स्थित हैं।
भारतीय सेना की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बीआरओ द्वारा पिछले एक वर्ष से बीआरओ जोशीमठ-मलारी (62 किमी) हाईवे के चौड़ीकरण कार्य में लगा हुआ है। वर्ष 2020 तक हाईवे को मलारी तक चौड़ीकरण कार्य पूर्ण कर डामरीकरण किया जाना है। इसके चलते बीआरओ यहां युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है।
हाईवे को हिल साइड से चौड़ा करने के लिए बोल्डरों को विस्फोट से उड़ाया जा रहा है। जो बोल्डर हाईवे पर आ रहे हैं, उन्हें भी विस्फोट से तोड़ा जा रहा है।
लाता गांव के ग्रामीण धन सिंह राणा और प्रेम सिंह रावत का कहना है कि बीआरओ ग्रामीणों की परवाह किए बिना एक साथ दस-दस विस्फोट कर रहा है, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विस्फोट से चार दिन पूर्व क्षेत्र के लिए सप्लाई हो रही विद्युत लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई थी, जो अभी तक ठीक नहीं की गई है।
मलारी हाईवे पर हर जगह हिल कटिंग है। बड़े-बड़े बोल्डर हाईवे पर आ रहे हैं। इस रोड पर कठोर पत्थर हैं, जिन्हें सिर्फ विस्फोट से ही उड़ाया जा सकता है। क्षेत्र में नियंत्रित विस्फोट किए जा रहे हैं।
- कर्नल आर सुब्रमण्यम, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ