पंजाब सरकार राज्य में नए बनाए एल-1-ए लाइसेंस के धारकों को 26 अप्रैल तक शराब का स्टाक जारी नहीं करेगी। एल-1-ए व्यवस्था बनाने से तीन कंपनियों का शराब कारोबार पर एकाधिकार होने का आरोप लगाते हुए याचिका पर सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में स्वयं यह आश्वासन दिया है।
एक्साइज विभाग ने हाईकोर्ट को बताया कि अभी एल-1-ए लाइसेंस नहीं दिए गए हैं और न ही ऐसे किसी लाइसेंस धारक को शराब का स्टाक जारी किया गया है। एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने बेंच को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई 26 अप्रैल तक कोई एल-1-ए लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। उस दिन इस मामले में अंतिम बहस होगी। पिछली सुनवाई पर एक्साइज विभाग ने नई व्यवस्था को सही ठहराते हुए कहा था कि इससे गड़बड़ी कम होगी और सरकार को राजस्व अधिक मिलेगा। याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह सिद्धू के वकील ने बेंच के समक्ष पैरवी की थी कि सरकार स्वयं मान रही है कि शराब कारोबार पर चंद कंपनियों का एकाधिकार हो रहा है।
जिनका शराब कारोबार पर कब्जा, उन्हें ही लाइसेंस देने का आरोप
पंजाब सरकार ने कहा था कि पिछले साल राज्य में में चार कंपनियों के पास शराब का 90 प्रतिशत कारोबार था। इस तरह कई स्तर पर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी, लेकिन अब एल-1-ए लाइसेंस पांच कारोबारी कंपनियों को दिए जाएंगे। इससे पहले की तुलना में अधिक राजस्व भी हासिल होगा और हरेक स्तर पर पूरी नजर रखी जा सकेगी। उधर, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा है कि जिन कंपनियों का शराब के 90 प्रतिशत कारोबार पर कब्जा था, उन्हें ही एल-1-ए लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं, लिहाजा कारोबार पर एकाधिकार स्थापित किया जा रहा है। याचिकाकर्ता विधायक बलबीर सिंह सिद्धू के छोटे भाई शराब कारोबारी अमरजीत सिंह सिद्धू हैं।
अमरजीत सिंह सिद्धू ने याचिका में राज्य में शराब के कारोबार पर पांच बड़ी कंपनियों की मोनोपली बनने की आशंका जताते हुए यह लाइसेंस ड्रा ऑफ लाट के माध्यम से या फिर हाईकोर्ट की ओर से जारी किए जाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार शराब का पहले से बड़ा कारोबार कर रहे डोडा ग्रुप, चड्ढा ग्रुप, मल्होत्रा ग्रुप और एडी ग्रुप जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। वैसे एक्साइज विभाग के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह लाइसेंस का कोई प्रावधान हटा सके या कोई नया लाइसेंस बना सके। इस दलील के साथ मांग की थी कि एल-1-ए के प्रावधान को क्रियान्वित करने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
शराब कारोबार पर मोनोपली की आशंका
पंजाब सरकार ने एल-1-ए लाइसेंस का नया प्रावधान बनाया है। इसके तहत शराब के लिए तीन और बीयर के लिए दो लाइसेंस दिए जाने हैं। लाइसेंस धारक कंपनियां या तो सरकार से सीधे शराब खरीद सकेंगी और या फिर राज्य के बाहर शराब उत्पादक कंपनियों सेे खरीद सकेंगी। इसके बाद ये लाइसेंस धारक शराब ठेकेदारों को शराब बेंचेंगे। इससे शराब के एल-वन कारोबारियों का शराब कंपनियों से सीधा संपर्क नहीं रहेगा और एल-1-ए लाइसेंस धारकों को बड़ा मुनाफा होगा। इसे ही पांच कंपनियों की शराब कारोबार पर मोनोपली होने की आशंका बताते हुए यह नई प्रणाली खत्म करने की मांग की गई है।