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दुनिया की दो अहम खबरें: ICJ ने रोहिंग्या से जुड़े दावों को किया खारिज, यूनिपर को मिला जर्मन सरकार का साथ
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेग
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 22 Jul 2022 10:53 PM IST
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सार
म्यांमार की ओर से वकीलों ने फरवरी में तर्क दिया था कि इस मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि विश्व अदालत (ICJ) केवल देशों के बीच के मामलों की सुनवाई करती है। रोहिंग्या (Rohingya) का मामला इस्लामिक सहयोग संगठन की ओर से गाम्बिया ने दायर किया है।
रोहिंग्या शरणार्थी
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च कोर्ट ने म्यामांर की प्रारम्भिक आपत्तियों शुक्रवार को खारिज कर दिया। आपत्तियों के जरिए आरोप लगाया गया था कि रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingyas) के नरसंहार के लिए म्यांमार सरकार (Myanmar Govt) जिम्मेदार है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) के इस निर्णय के साथ ही गाम्बिया की ओर से म्यांमार के शासकों के खिलाफ नरसंहार के आरोपों की सुनवाई आगे जारी रहेगी।
रोहिंग्या के साथ किए जाने वाले कथित दुर्व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न आक्रोश के बीच गाम्बिया ने विश्व अदालत में मामला दायर कर आरोप लगाया था कि म्यांमार नरसंहार संधि का उल्लंघन कर रहा है। दलील दी गई कि गाम्बिया और म्यांमार दोनों ही संधि के पक्षकार हैं और सभी हस्ताक्षरकर्ताओं का यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इसे लागू किया जाए।
म्यांमार की ओर से वकीलों ने फरवरी में तर्क दिया था कि इस मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि विश्व अदालत केवल देशों के बीच के मामलों की सुनवाई करती है। रोहिंग्या का मामला इस्लामिक सहयोग संगठन की ओर से गाम्बिया ने दायर किया है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि गाम्बिया इस मामले में अदालत नहीं जा सकता, क्योंकि यह सीधे तौर पर म्यांमार की घटनाओं से जुड़ा नहीं था और मामला दायर होने से पहले दोनों देशों के बीच कोई कानूनी विवाद भी नहीं था।
गैस आयातक कंपनी की मदद करेगी जर्मन सरकार
वहीं, जर्मनी की सरकार मुश्किलों से घिरी ऊर्जा कंपनी यूनिपर में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी लेकर उसे राहत देने के लिए तैयार हो गई है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने शुक्रवार को इस गैस आयातक फर्म में 30 फीसदी हिस्सेदारी लेने की घोषणा करते हुए कहा कि यूनिपर को स्थिर करने के लिए ऐसा करना जरूरी था। इस राहत पैकेज के तहत जर्मन सरकार कंपनी में 26.7 करोड़ यूरो की पूंजी डालेगी। इसके अलावा सरकारी निवेश बैंक केएफडब्ल्यू से भी उसे नौ अरब यूरो का ऋण दिया जाएगा।
रूस से प्राकृतिक गैस का आयात करने वाली सबसे बड़ी जर्मन फर्म यूनिपर ने दो हफ्ते पहले सरकार से राहत पैकेज देने की मांग की थी। प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों और रूस से आपूर्ति पर पड़ रहे असर से यूनिपर के कामकाज पर काफी असर पड़ा है। यूनिपर रूसी गैस कंपनी गैजप्रॉम से गैस खरीदकर जर्मनी के उद्योगों, बिजली उत्पादकों और घरों तक पहुंचाती रही है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में गैजप्रॉम ने अपनी गैस आपूर्ति में भारी कटौती कर दी है। जिससे यूनिपर को ऊंचे दाम पर दूसरी जगह से गैस खरीदनी पड़ी है।
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रोहिंग्या के साथ किए जाने वाले कथित दुर्व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न आक्रोश के बीच गाम्बिया ने विश्व अदालत में मामला दायर कर आरोप लगाया था कि म्यांमार नरसंहार संधि का उल्लंघन कर रहा है। दलील दी गई कि गाम्बिया और म्यांमार दोनों ही संधि के पक्षकार हैं और सभी हस्ताक्षरकर्ताओं का यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इसे लागू किया जाए।
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म्यांमार की ओर से वकीलों ने फरवरी में तर्क दिया था कि इस मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि विश्व अदालत केवल देशों के बीच के मामलों की सुनवाई करती है। रोहिंग्या का मामला इस्लामिक सहयोग संगठन की ओर से गाम्बिया ने दायर किया है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि गाम्बिया इस मामले में अदालत नहीं जा सकता, क्योंकि यह सीधे तौर पर म्यांमार की घटनाओं से जुड़ा नहीं था और मामला दायर होने से पहले दोनों देशों के बीच कोई कानूनी विवाद भी नहीं था।
गैस आयातक कंपनी की मदद करेगी जर्मन सरकार
वहीं, जर्मनी की सरकार मुश्किलों से घिरी ऊर्जा कंपनी यूनिपर में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी लेकर उसे राहत देने के लिए तैयार हो गई है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने शुक्रवार को इस गैस आयातक फर्म में 30 फीसदी हिस्सेदारी लेने की घोषणा करते हुए कहा कि यूनिपर को स्थिर करने के लिए ऐसा करना जरूरी था। इस राहत पैकेज के तहत जर्मन सरकार कंपनी में 26.7 करोड़ यूरो की पूंजी डालेगी। इसके अलावा सरकारी निवेश बैंक केएफडब्ल्यू से भी उसे नौ अरब यूरो का ऋण दिया जाएगा।
रूस से प्राकृतिक गैस का आयात करने वाली सबसे बड़ी जर्मन फर्म यूनिपर ने दो हफ्ते पहले सरकार से राहत पैकेज देने की मांग की थी। प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों और रूस से आपूर्ति पर पड़ रहे असर से यूनिपर के कामकाज पर काफी असर पड़ा है। यूनिपर रूसी गैस कंपनी गैजप्रॉम से गैस खरीदकर जर्मनी के उद्योगों, बिजली उत्पादकों और घरों तक पहुंचाती रही है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में गैजप्रॉम ने अपनी गैस आपूर्ति में भारी कटौती कर दी है। जिससे यूनिपर को ऊंचे दाम पर दूसरी जगह से गैस खरीदनी पड़ी है।