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Pavel Durov Row: रूस में टेलीग्राम फाउंडर पावेल डुरोव पर लगे आतंकवाद के आरोपों की जांच शुरू, बैन हो सकता है एप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 25 Feb 2026 07:46 AM IST
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सार
रूस ने टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए जांच शुरू की है। कहा जा रहा कि सरकार एप को बंद करने का कदम उठा सकती है। डुरोव ने इसे बोलने की आजादी पर हमला बताया है। रूसी सेना भी युद्ध में इस एप का इस्तेमाल करती है, इसलिए कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं।
पावेल डुरोव
- फोटो : इंस्टाग्राम/@pavel durov
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विस्तार
टेलीग्राम मैसेजिंग एप के फाउंडर पावेल डुरोव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रूसी सरकार ने उनके खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू कर दी है। उन पर आतंकवाद में मदद करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
डुरोव ने क्या कहा?
डुरोव का जन्म रूस में ही हुआ था और उन्होंने अपना करियर भी वहीं से शुरू किया था। उन्होंने मॉस्को पर आरोप लगाया कि सरकार प्राइवेसी और बोलने की आजादी को दबाना चाहती है। डुरोव का कहना है कि रूसी नागरिकों की टेलीग्राम तक पहुंच रोकने के लिए सरकार बहाने बना रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, यह एक ऐसे देश का दुखद नजारा है जो अपने ही लोगों से डरता है।
इससे पहल रूसी मीडिया ने खबरें दी थीं कि रूस की सुरक्षा एजेंसी (एफएसबी) ने डुरोव के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। यह कदम रूस की संचार संस्था 'रोसकोम्नाडजोर' की चेतावनी के दो हफ्ते बाद उठाया गया है। संस्था ने टेलीग्राम पर रूसी कानूनों को न मानने का आरोप लगाते हुए एप को बैन करने की बात कही थी।
ये भी पढ़ें: PM Modi Israel Visit: आज से इस्राइल दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी, 71 हजार करोड़ के रक्षा सौदों पर टिकीं निगाहें
लोगों में भड़का गुस्सा
इस फैसले से रूस में लोगों का गुस्सा भड़क गया है। यहां तक कि क्रेमलिन का समर्थन करने वाले मिलिट्री ब्लॉगर्स ने भी इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिक बातचीत के लिए टेलीग्राम का बहुत इस्तेमाल करते हैं। अगर इसे बंद किया गया तो सेना के कम्युनिकेशन में भारी दिक्कत आएगी।
हालांकि, रूसी अधिकारी इसे सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। डिजिटल डेवलपमेंट मंत्री मकसूद शादायेव ने कहा कि विदेशी खुफिया एजेंसियां टेलीग्राम के जरिए रूसी सैनिकों के मैसेज पढ़ सकती हैं। वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि एफएसबी को टेलीग्राम पर कई नियमों के उल्लंघन और देश के लिए खतरनाक कंटेंट की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम सहयोग नहीं कर रहा था, इसलिए एजेंसियां जरूरी कदम उठा रही हैं।
इंटरनेट पर बढ़ी सख्ती
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राज में इंटरनेट पर सख्ती काफी बढ़ गई है। अधिकारियों ने यूट्यूब, सिग्नल और वाइबर जैसे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ऑनलाइन कॉल करने पर भी रोक है। दिसंबर में एप्पल की फेसटाइम सर्विस भी रोकी गई थी। लोग वीपीएन का इस्तेमाल करके कुछ रोक से बचते हैं, लेकिन सरकार उन्हें भी अक्सर ब्लॉक कर देती है।
ये भी पढ़ें: UN: रूस-यूक्रेन के बीच बिना शर्त सीजफायर की मांग वाला मसौदा प्रस्ताव, भारत ने मतदान से किया परहेज
सरकार इस एप को दे रही बढ़ावा
इन सबके बीच, रूस 'मैक्स' नाम के एक नेशनल मैसेजिंग एप को बढ़ावा दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल जासूसी के लिए हो सकता है। यह एप सरकार के मांगने पर यूजर का डेटा शेयर करने की बात खुले तौर पर कहता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें मैसेज पूरी तरह सुरक्षित (एन्क्रिप्टेड) नहीं होते।
डुरोव की मुश्किलें सिर्फ रूस तक सीमित नहीं हैं। साल 2024 में उन्हें पेरिस में भी गिरफ्तार किया गया था। वहां उन पर आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी और बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री बांटने जैसे गैर-कानूनी कामों के लिए हो रहा था।
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डुरोव ने क्या कहा?
डुरोव का जन्म रूस में ही हुआ था और उन्होंने अपना करियर भी वहीं से शुरू किया था। उन्होंने मॉस्को पर आरोप लगाया कि सरकार प्राइवेसी और बोलने की आजादी को दबाना चाहती है। डुरोव का कहना है कि रूसी नागरिकों की टेलीग्राम तक पहुंच रोकने के लिए सरकार बहाने बना रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, यह एक ऐसे देश का दुखद नजारा है जो अपने ही लोगों से डरता है।
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इससे पहल रूसी मीडिया ने खबरें दी थीं कि रूस की सुरक्षा एजेंसी (एफएसबी) ने डुरोव के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। यह कदम रूस की संचार संस्था 'रोसकोम्नाडजोर' की चेतावनी के दो हफ्ते बाद उठाया गया है। संस्था ने टेलीग्राम पर रूसी कानूनों को न मानने का आरोप लगाते हुए एप को बैन करने की बात कही थी।
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लोगों में भड़का गुस्सा
इस फैसले से रूस में लोगों का गुस्सा भड़क गया है। यहां तक कि क्रेमलिन का समर्थन करने वाले मिलिट्री ब्लॉगर्स ने भी इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिक बातचीत के लिए टेलीग्राम का बहुत इस्तेमाल करते हैं। अगर इसे बंद किया गया तो सेना के कम्युनिकेशन में भारी दिक्कत आएगी।
हालांकि, रूसी अधिकारी इसे सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। डिजिटल डेवलपमेंट मंत्री मकसूद शादायेव ने कहा कि विदेशी खुफिया एजेंसियां टेलीग्राम के जरिए रूसी सैनिकों के मैसेज पढ़ सकती हैं। वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि एफएसबी को टेलीग्राम पर कई नियमों के उल्लंघन और देश के लिए खतरनाक कंटेंट की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम सहयोग नहीं कर रहा था, इसलिए एजेंसियां जरूरी कदम उठा रही हैं।
इंटरनेट पर बढ़ी सख्ती
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राज में इंटरनेट पर सख्ती काफी बढ़ गई है। अधिकारियों ने यूट्यूब, सिग्नल और वाइबर जैसे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ऑनलाइन कॉल करने पर भी रोक है। दिसंबर में एप्पल की फेसटाइम सर्विस भी रोकी गई थी। लोग वीपीएन का इस्तेमाल करके कुछ रोक से बचते हैं, लेकिन सरकार उन्हें भी अक्सर ब्लॉक कर देती है।
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सरकार इस एप को दे रही बढ़ावा
इन सबके बीच, रूस 'मैक्स' नाम के एक नेशनल मैसेजिंग एप को बढ़ावा दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल जासूसी के लिए हो सकता है। यह एप सरकार के मांगने पर यूजर का डेटा शेयर करने की बात खुले तौर पर कहता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें मैसेज पूरी तरह सुरक्षित (एन्क्रिप्टेड) नहीं होते।
डुरोव की मुश्किलें सिर्फ रूस तक सीमित नहीं हैं। साल 2024 में उन्हें पेरिस में भी गिरफ्तार किया गया था। वहां उन पर आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी और बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री बांटने जैसे गैर-कानूनी कामों के लिए हो रहा था।
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