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संकट: खोखले ढांचे वाली इमारतों को आशियाना बना रहे चीनी युवा, अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते छोड़ रहे नौकरी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Pavan
Updated Tue, 03 Mar 2026 07:30 AM IST
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सार
चीन की आर्थिक मंदी का असर युवाओं पर साफ दिख रहा है। ऊंची तनख्वाह वाली नौकरियां करने वाले कई युवा अब काम छोड़कर सस्ती और अधूरी पड़ी आवासीय परियोजनाओं में रहने लगे हैं। शंघाई जैसे बड़े शहरों में महंगी जिंदगी और कंपनियों की सुबह 9 से रात 9 तक 12 घंटे काम कराने वाली कठोर व्यवस्था से परेशान होकर युवा अलग रास्ता चुन रहे हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चीन में अब तक कई बेकार पड़ी आवासीय परियोजनाएं देश की अर्थव्यवस्था के मंदी में आने के कारण युवाओं को आकर्षित करने लगी हैं। आर्थिक मंदी के चलते चीन की वाणिज्यिक राजधानी शंघाई में उच्च वेतन पर नौकरी करने वाले भी नौकरी छोड़ ऐसी परियोजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं। इन्हीं परियोजनाओं में से एक है इतालवी प्रतिकृति के रूप में बनीं अरबों डॉलर की लाइफ इन वेनिस आवासीय परियोजना, जिसमें युवाओं ने रुचि दिखाई है।
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जिग्यांसु में यह परियोजना दूरस्थ इलाके में बनी, जहां हजारों घरों में से कई घर खोखले ढांचे मात्र हैं। यहां रहने के लिए शंघाई में ऊंचे वेतन पर नौकरी कर रही सासा चेन जैसे लोग भी रहने चले गए हैं। चेन ने आर्थिक मंदी के चलते 28 साल में सेवानिवृत्ति ले ली है।
मंदी के साथ मौके घटे तो सस्ते घर बने सहारा
चीन में बिगड़ती अर्थव्यवस्था के चलते इन हालात को बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। बीते दशकों में, चीन का उभरता हुआ मध्यम वर्ग नौकरियों और सपनों को पूरा करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे महानगरों की ओर उमड़ पड़ा, जो कभी देश के गरीबी से अमीरी की ओर बढ़ने के दौरान प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे।
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12 घंटे तक सख्ती से काम ले रही कंपनियां
चीन की अधिकांश बड़ी कंपनियां सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करने का अनिवार्य समय निर्धारित करती हैं। 12 घंटे तक सख्ती से काम लेने की प्रवृत्ति एक बेहद कठिन जीवनशैली है। इस अत्यधिक दबाव के कारण, कुछ युवा पेशेवरों ने नौकरी छोड़ दी है और आरामदायक जीवनशैली नाम के एक प्रतिरोध आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
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जिग्यांसु में यह परियोजना दूरस्थ इलाके में बनी, जहां हजारों घरों में से कई घर खोखले ढांचे मात्र हैं। यहां रहने के लिए शंघाई में ऊंचे वेतन पर नौकरी कर रही सासा चेन जैसे लोग भी रहने चले गए हैं। चेन ने आर्थिक मंदी के चलते 28 साल में सेवानिवृत्ति ले ली है।
मंदी के साथ मौके घटे तो सस्ते घर बने सहारा
चीन में बिगड़ती अर्थव्यवस्था के चलते इन हालात को बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। बीते दशकों में, चीन का उभरता हुआ मध्यम वर्ग नौकरियों और सपनों को पूरा करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे महानगरों की ओर उमड़ पड़ा, जो कभी देश के गरीबी से अमीरी की ओर बढ़ने के दौरान प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे।
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12 घंटे तक सख्ती से काम ले रही कंपनियां
चीन की अधिकांश बड़ी कंपनियां सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करने का अनिवार्य समय निर्धारित करती हैं। 12 घंटे तक सख्ती से काम लेने की प्रवृत्ति एक बेहद कठिन जीवनशैली है। इस अत्यधिक दबाव के कारण, कुछ युवा पेशेवरों ने नौकरी छोड़ दी है और आरामदायक जीवनशैली नाम के एक प्रतिरोध आंदोलन में शामिल हो गए हैं।