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सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ने प्राकृतिक खेती कर उगाई 10 क्विंटल हल्दी, इतने रुपये किलो मिले दाम
प्राकृतिक खेत को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने और इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयास काफी अच्छे परिणाम ला रहे हैं। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती से उगाई गई गेहूं को 60 रुपये प्रति किलो और मक्की को 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है, वहीं कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो दाम निर्धारित किया गया है। इस योजना से प्रभावित होकर हल्दी की खेती शुरू करने वाले भोरंज उपमंडल की ग्राम पंचायत भुक्कड़ के गांव बैरी ब्राहम्णा के शिक्षाविद सुभाष कपिला और उनकी पत्नी उर्मिला कपिला ने इस सीजन में लगभग 10 क्विंटल हल्दी पैदा करके क्षेत्र के किसानों-बागवानों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्कूल प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त 76 वर्षीय सुभाष कपिला और शिक्षा विभाग से ही टीजीटी के पद से सेवानिवृत्त उनकी पत्नी उर्मिला कपिला का बेटा डेंटल सर्जन और बहू सीनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद सुभाष कपिला और उर्मिला कपिला ने खेती नहीं छोड़ी है। वे अपने खेतों में रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते हैं।
सरकार ने जब प्रदेश में प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली फसलों के लिए अलग से उच्च दाम निर्धारित किए तो वयोवृद्ध कपिला दंपती ने हल्दी उगाने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग की एसएमएस मोनिका शर्मा और अन्य अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया तथा विभाग से हल्दी का बीज भी लिया। सुभाष कपिला ने बताया कि इस सीजन में उन्हें लगभग 10 क्विंटल पैदावार हुई है। उनका कहना है कि हल्दी की खेती में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है और यह ऐसी फसल है, जिसे जंगली जानवर कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसके लिए रासायनिक खाद या कीटनाशकों की जरुरत भी नहीं होती है। प्रदेश सरकार इसे 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही है। इसलिए, हल्दी की खेती में किसानों को फायदा ही फायदा है।
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