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उत्तराखंडः बदमाशों का शॉफ्ट टारगेट बना सिडकुल

हरिद्वार/ब्यूरो Updated Tue, 02 Jul 2013 05:15 PM IST
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Sidcul is the easiest way for robbers
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कभी वीरान रहने वाला शिवालिक पर्वत माला की तलहटी में बसा हरिद्वार का रोशनाबाद इलाका औद्योगिक विकास के बाद बदमाशों का साफ्ट टारगेट बन गया है। सिडकुल के बेनाम रास्ते और उनमें लगने वाला श्रमिकों का मेला बदमाशों को वारदात कर आसानी से फुर्र होने में मदद करता है।

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यही नहीं सिडकुल के आसपास बसे गांवों से निकलकर बदमाश सीमा पार कर जाते हैं। यही कारण है कि सिडकुल में लूट, चोरी और चेन स्नेचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं।

वर्ष 2004 में रोशनाबाद, औरंगाबाद, रावली महदूद, सेलमतपुर और आन्नेकी गांवों की जमीन अधिग्रहण कर एकीकृत औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल की स्थापना की गई थी। शिवालिक पर्वत माला और उससे निकलने वाली धनौरी, पथरी और रानीपुर की बरसाती नदियों के साथ यह इलाका वीरानी से भरा था लेकिन, सिडकुल बनने के बाद ये इलाका गुलजार हो गया।
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करीब 500 औद्योगिक इकाइयां इसमें स्थापित हुईं। आसपास कालोनियां बनी और गांवों का इलाकों भी विकसित हो गया। आर्थिक तरक्की और महीने भर होने वाले करोड़ों के लेन-देन ने बदमाशों का ध्यान सिडकुल की ओर खींचा। पिछले कुछ सालों में सिडकुल में लूट, चोरी और चेन स्नेचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं।

कभी सिडकुल में काम करने वाले ठेकेदारों से लूट तो कभी आम आदमी को निशाना बनाया जाता है। यही नहीं महिलाओं से चेन स्नेचिंग की घटनाएं भी आम हो गई हैं। बदमाश सिडकुल की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर आसानी से फुर्र हो जाते हैं।

कुछ प्रमुख घटनाएं

-तनख्वाह बांटने जा रहे ठेकेदार से लूट
-पेट्रोल पंप पर सेल्समेन से लूट
-रिटायर्ड भेलकर्मी के घर डाली डकैती
-जमीन बेचकर आ रही महिला से लूट का प्रयास
-शिवालिक नगर में एक दिन में दो महिलाओं से चेन स्नेचिंग
-सेक्टर-वन में महिला फार्मेसिस्ट की चेन छीनी

थाना खोलने पर नहीं बनी बात
क्षेत्र बड़ा होने के कारण लंबे समय से सिडकुल में थाना खोले जाने की मांग चल रही है। लेकिन, अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। उद्यमी कई बार सिडकुल चौकी को थाना बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। क्षेत्र के हिसाब से फोर्स की कमी भी अपराध रोकने में मुश्किल खड़ी करती है।

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