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कीवी उत्पादक हरीश कोरंगा बने लोगों के लिए मिसाल
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बागेश्वर के लीती में कीवी की बेल में लगे फल। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। खेती, किसानी पहाड़ के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन रही है। हालांकि बदलते समय के साथ लोग खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं, बावजूद इसके कुछ मेहनतकश किसानों ने खेेती में नए-नए प्रयोग कर खेती को बेहतर आय का जरिया बना लिया है। इन्हीं किसानों में शामिल हैं लीती गांव के हरीश कोरंगा। हरीश ने वर्ष 2004 में कीवी की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्हें कुछ दिक्कतें आईं लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने कीवी को बेहतर आय का जरिया बना लिया। वर्तमान में वह कीवी के फल, पौधे, जैम, जूस, स्कवैश, चटनी और अचार बेचकर करीब आठ लाख रुपये सालाना का कारोबार कर रहे हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के 15 अन्य किसानों ने भी कीवी की खेती शुरू कर दी है।
हरीश कोरंगा ने हिमाचल प्रदेश से 350 रुपये प्रति पौधे की दर से 100 पौधे खरीदकर कीवी की खेती शुरू की थी। शुरुआत में क्षेत्र के लोग कीवी से अनजान थे। तीन साल बाद जब हरीश के पौधों ने फल देना शुरू किया तो विपणन की समस्या थी। उन्होंने बागेश्वर में दुकान-दुकान जाकर अपने फल का प्रचार किया। उत्तरायणी और अन्य मेलों में स्टॉल लगाकर फल बेचा। धीरे-धीरे कीवी के बारे में जानकारी होने पर लोग उनसे संपर्क करने लगे। हरीश के कार्य को गति देने में ग्राम्या परियोजना का भी अहम योगदान रहा। ग्राम्या की ओर से पौधों को ओलावृष्टि से बचाने के लिए जाल (नेट) और अन्य सहायता मिली।
हरीश बताते हैं कि पहले उनका कारोबार कीवी के फल तक ही सीमित था लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पौध तैयार करना शुरूकिया। कारोबार को आगे बढ़ाते हुए कीवी को प्रोसेसिंग कर अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया और घर पर ही प्रोसेसिंग शुरू की। लीती आने वाले सैलानियों को उनके कारोबार की जानकारी मिली तो कारोबार बढ़ने लगा। पहले जहां उन्हें बागेश्वर जाकर अपना उत्पाद बेचना पड़ता था, अब घर पर ही ग्राहक पहुंच जाते हैं। वर्तमान में उनके पास 11 हजार पौध तैयार हैं, जिन्हें वे 150 से 175 रुपये प्रति पौध की दर से बेच रहे हैं। उन्होंने कारोबार में मदद के लिए गांव के पांच लोगों को रोजगार पर रखा है। परिवार के सदस्य भी उनका हाथ बंटाते हैं। कीवी के अलावा हरीश मौसमी सब्जी भी उगाते हैं। सब्जियों से भी उन्हें अच्छी आमदनी होती है।
कीवी फल बहुउपयोगी है। इसके गुणों की जानकारी होने पर ही खेती शुरू की थी। अब तक गांव में केवल मेरे यहां ही कीवी फलों का उत्पादन हो रहा है। इसके गुणों को देखते हुए अब अन्य किसान भी कीवी की खेती कर रहे हैं। आने वाले पांच वर्षों में लीती गांव कीवी उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन जाएगा।
हरीश कोरंगा, कीवी उत्पादक, लीती
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हरीश कोरंगा ने हिमाचल प्रदेश से 350 रुपये प्रति पौधे की दर से 100 पौधे खरीदकर कीवी की खेती शुरू की थी। शुरुआत में क्षेत्र के लोग कीवी से अनजान थे। तीन साल बाद जब हरीश के पौधों ने फल देना शुरू किया तो विपणन की समस्या थी। उन्होंने बागेश्वर में दुकान-दुकान जाकर अपने फल का प्रचार किया। उत्तरायणी और अन्य मेलों में स्टॉल लगाकर फल बेचा। धीरे-धीरे कीवी के बारे में जानकारी होने पर लोग उनसे संपर्क करने लगे। हरीश के कार्य को गति देने में ग्राम्या परियोजना का भी अहम योगदान रहा। ग्राम्या की ओर से पौधों को ओलावृष्टि से बचाने के लिए जाल (नेट) और अन्य सहायता मिली।
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हरीश बताते हैं कि पहले उनका कारोबार कीवी के फल तक ही सीमित था लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पौध तैयार करना शुरूकिया। कारोबार को आगे बढ़ाते हुए कीवी को प्रोसेसिंग कर अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया और घर पर ही प्रोसेसिंग शुरू की। लीती आने वाले सैलानियों को उनके कारोबार की जानकारी मिली तो कारोबार बढ़ने लगा। पहले जहां उन्हें बागेश्वर जाकर अपना उत्पाद बेचना पड़ता था, अब घर पर ही ग्राहक पहुंच जाते हैं। वर्तमान में उनके पास 11 हजार पौध तैयार हैं, जिन्हें वे 150 से 175 रुपये प्रति पौध की दर से बेच रहे हैं। उन्होंने कारोबार में मदद के लिए गांव के पांच लोगों को रोजगार पर रखा है। परिवार के सदस्य भी उनका हाथ बंटाते हैं। कीवी के अलावा हरीश मौसमी सब्जी भी उगाते हैं। सब्जियों से भी उन्हें अच्छी आमदनी होती है।
कीवी फल बहुउपयोगी है। इसके गुणों की जानकारी होने पर ही खेती शुरू की थी। अब तक गांव में केवल मेरे यहां ही कीवी फलों का उत्पादन हो रहा है। इसके गुणों को देखते हुए अब अन्य किसान भी कीवी की खेती कर रहे हैं। आने वाले पांच वर्षों में लीती गांव कीवी उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन जाएगा।
हरीश कोरंगा, कीवी उत्पादक, लीती

हरीश सिंह कोरंगा।- फोटो : BAGESHWAR

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