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अवैध वसूली के विरोध में हुई ऑटो हड़ताल

अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Mon, 23 May 2016 11:29 PM IST
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Auto strike in protest against extortion
रायबरेली में सोमवार को अवैध वसूली के विरोध ममें प्रदर्शन करते ऑटो चालक। - फोटो : अमर उजाला
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कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अवैध वसूली बंद न होने से नाराज ऑटो चालकों ने सोमवार को चक्का जाम कर दिया और हड़ताल पर चले गए। इससे मुसाफिरों को रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन समेत अन्य स्थानों से आने-जाने में काफी परेशानी हुई। लोग तेज धूप में पैदल चलने को मजबूर हुए।
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आंदोलित ऑटो चालक सुबह डीह रोड पर गोरा बाजार स्थित मैदान में एकत्र हुए और अपने-अपने ऑटो खड़ा करके नगर पालिका परिषद के खिलाफ नारेबाजी की। रायबरेली ऑटो चालक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार वर्मा और महामंत्री संदीप विश्वकर्मा ने कहा कि कोर्ट की ओर से शहर में रोड टैक्स के अलावा और किसी तरह की वसूली न करने के आदेश हैं।
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बावजूद इसके नगर पालिका परिषद की ओर से ऑटो चालकों से उगाही की जा रही है। सालाना 500 रुपये टैक्स के साथ ही प्रतिदिन 50 से 80 रुपये तक वसूल लिए जाते हैं। सदस्य रुपेश सिंह, विजय गुप्ता, आशाराम, रामकरन व फतेहबहादुर ने कहा कि कई बार डीएम को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन प्रशासन ने इसे अनदेखा कर दिया।

इस बार वसूली बंद होने तक यह हड़ताल जारी रहेगी। ऑटो चालक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार वर्मा का कहना है कि शहर में करीब 1500 ऑटो हैं। हड़ताल के पहले दिन 500 से अधिक ऑटो नहीं चले। मंगलवार से कोई भी ऑटो सड़क पर नहीं चलेगा। न ही सवारियां ढोई जाएंगी।

ऑटो चालकों का नुकसान होता है तो हो, लेकिन उत्पीड़न के खिलाफ संगठन इस बार आरपार की लड़ाई लड़ेगा। इतना ही नहीं मंगलवार से ही भूखहड़ताल भी शुरू की जाएगी, जो अवैध वसूली बंद होने तक चलती रहेगी।

वहीं ऑटो चालकों की हड़ताल से हुई परेशानी के लिए लोगों ने नगर पालिका को जिम्मेदार बताया। निराला नगर के सुरेंद्र शुक्ला, राना नगर के शैलेंद्र पांडेय, इंदिरा नगर के वीरेंद्र कुमार, अमर नगर के एके सिंह, कहारो का अड्डा के मोहम्मद आलम आदि ने कहा कि हड़ताल की वजह से काफी परेशानी हुई।

अफसरों को चाहिए था कि कई दिन से आंदोलन की धमकी दे रहे ऑटो चालकों की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करते, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे लोगों को परेशानी हुई। उधर नगर पालिका परिषद के ईओ पीएन सिंह का कहना है कि नगर पालिका की ओर से क्षेत्र में चलने वाले ऑटो का हर साल लाइसेंस बनाया जाता है। इसके लिए सालाना शुल्क जमा होता है। यह शुल्क ऑटो चालक नहीं देना चाहते हैं। प्रतिदिन हो रही वसूली की बात पूरी तरह से गलत है।
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