{"_id":"6a30651a09037fd604075dd1","slug":"2431-council-schools-to-receive-a-composite-grant-of-799-crore-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-161826-2026-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: 2431 परिषदीय विद्यालयों को मिलेगी 7.99 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: 2431 परिषदीय विद्यालयों को मिलेगी 7.99 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 16 Jun 2026 02:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पडरौना। जिले के 2431 परिषदीय विद्यालयों को शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कंपोजिट स्कूल ग्रांट जारी कर दी गई है। इसके तहत कुल 7.99 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।प्रथम चरण में कुल धनराशि का 50 प्रतिशत यानी 3.99 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एक सप्ताह के भीतर विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के खातों में भेजी जाएगी।
जिला समन्वयक निर्माण गौरव पांडेय ने बताया कि छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को चार श्रेणियों में विभाजित कर अनुदान दिया जाएगा। एक से 30 छात्र संख्या वाले विद्यालयों को 10 हजार रुपये, 31 से 100 तक नामांकन वाले विद्यालयों को 25 हजार रुपये, 101 से 250 तक नामांकन वाले विद्यालयों को 50 हजार रुपये तथा 250 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों को 75 हजार रुपये की ग्रांट मिलेगी। उन्होंने बताया कि अनुदान राशि का संचालन विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सदस्य सचिव (प्रधानाध्यापक) के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। जिन विद्यालयों में नामांकन शून्य है, अथवा जो पीएम श्री योजना से आच्छादित हैं, उन्हें यह अनुदान नहीं दिया जाएगा।
बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर कंपोजिट ग्रांट की कम से कम 10 प्रतिशत राशि स्वच्छता कार्योंपर खर्च करना अनिवार्य होगा। इसके तहत टॉयलेट क्लीनर, फिनाइल, साबुन, हैंडवॉश, सैनिटाइजर, झाडू समेत अन्य स्वच्छता सामग्री की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही शौचालयों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, रसोईघर की जल निकासी और पिट निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सभी कार्यों की पूर्व और बाद की फोटो तथा बिल क्र वाउचर प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
विज्ञापन
बीएसए ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कार्यों के निरीक्षण और सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक, विद्यालय प्रबंधन समिति या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन ने प्रत्येक विकासखंड में रैंडम आधार पर विद्यालयों की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में व्हाइट या ग्रीन बोर्ड, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर शिक्षा, इंटरनेट सुविधा और प्रयोगशाला सामग्री की खरीद भी इसी मद से की जा सकेगी। पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने पर कक्षा-कक्षों का टाइलीकरण तथा 100 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में आरओ वाटर कूलर और कूलर की स्थापना भी कराई जा सकेगी।
जिला समन्वयक निर्माण गौरव पांडेय ने बताया कि छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को चार श्रेणियों में विभाजित कर अनुदान दिया जाएगा। एक से 30 छात्र संख्या वाले विद्यालयों को 10 हजार रुपये, 31 से 100 तक नामांकन वाले विद्यालयों को 25 हजार रुपये, 101 से 250 तक नामांकन वाले विद्यालयों को 50 हजार रुपये तथा 250 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों को 75 हजार रुपये की ग्रांट मिलेगी। उन्होंने बताया कि अनुदान राशि का संचालन विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सदस्य सचिव (प्रधानाध्यापक) के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। जिन विद्यालयों में नामांकन शून्य है, अथवा जो पीएम श्री योजना से आच्छादित हैं, उन्हें यह अनुदान नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर कंपोजिट ग्रांट की कम से कम 10 प्रतिशत राशि स्वच्छता कार्योंपर खर्च करना अनिवार्य होगा। इसके तहत टॉयलेट क्लीनर, फिनाइल, साबुन, हैंडवॉश, सैनिटाइजर, झाडू समेत अन्य स्वच्छता सामग्री की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही शौचालयों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, रसोईघर की जल निकासी और पिट निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सभी कार्यों की पूर्व और बाद की फोटो तथा बिल क्र वाउचर प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
बीएसए ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कार्यों के निरीक्षण और सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक, विद्यालय प्रबंधन समिति या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन ने प्रत्येक विकासखंड में रैंडम आधार पर विद्यालयों की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में व्हाइट या ग्रीन बोर्ड, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर शिक्षा, इंटरनेट सुविधा और प्रयोगशाला सामग्री की खरीद भी इसी मद से की जा सकेगी। पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने पर कक्षा-कक्षों का टाइलीकरण तथा 100 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में आरओ वाटर कूलर और कूलर की स्थापना भी कराई जा सकेगी।