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Kanpur News: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की नहर टूटी, खेत जलमग्न
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कानपुर। शेखपुर चौराहे के पास सोमवार सुबह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की नहर (इरिगेशन चैनल) टूटने से खेत जलमग्न हो गए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को नोटिस देकर जल्द से जल्द मरम्मत कराने के लिए कहा है। नगर निगम ने भी दोपहर में ट्रीटमेंट प्लांट से इस नहर में पानी की आपूर्ति बंद कराकर मरम्मत शुरू कराई। इसकी वजह से दोपहर से देर रात तक करोड़ों लीटर शोधित पानी गंगा में जाता रहा। नगर निगम ने देर रात तक मरम्मत कार्य पूरा करने का दावा किया है।
बाजिदपुर, जाजमऊ स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में रोज करीब 16-17 करोड़ लीटर सीवेज शोधित होता है। शोधन के बाद इसे इरीगेशन चैनल (नहर) के माध्यम से वहां से महाराजपुर की तरफ स्थित खेतों में सिंचाई के लिए भेजा जाता है। दशकों पुरानी कच्ची नहर सुबह शेखपुर चौराहे के पास टूट गई। इससे तेजी से पानी खेतों में घुस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देखते ही देखते खेत जलमग्न हो गए। कुछ खेतों में फूलों की खेती भी खराब हो गई। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम मौके पर पहुंची। बोर्ड ने तत्काल नहर की मरम्मत के लिए नगर निगम से कहा। सक्रिय हुए नगर निगम ने जल निगम (ग्रामीण) को पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि नहर क्षतिग्रस्त हो गई है। इसकी मरम्मत के लिए एसटीपी से उसमें पानी की आपूर्ति बंद करने के लिए कहा। जल निगम ने दोपहर 1:00 बजे एसटीपी के पंप बंद कराए। इससे शोधित पानी नहर के बजाय चोर नाले के माध्यम से सीधे गंगा में चला गया।
कोट
नगर निगम के कहने पर दोपहर में एसटीपी से नहर में पानी छोड़ना बंद कर दिया गया। शोधित पानी गंगा में छोड़ना पड़ रहा है। नगर निगम से जल्द से जल्द मरम्मत कराने के लिए कहा है, ताकि शोधित पानी नहर में जाने लगे।
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- मोहित चक, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)
एसटीपी के इरिगेशन चैनल की मरम्मत करा रहा हूं। इसके क्षतिग्रस्त हिस्से में बालू भरी बोरियां लगवाई जा रही है। देर रात तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
- दिवाकर भास्कर, प्रभारी अभियंता, जोन-दो, नगर निगम
बाजिदपुर, जाजमऊ स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में रोज करीब 16-17 करोड़ लीटर सीवेज शोधित होता है। शोधन के बाद इसे इरीगेशन चैनल (नहर) के माध्यम से वहां से महाराजपुर की तरफ स्थित खेतों में सिंचाई के लिए भेजा जाता है। दशकों पुरानी कच्ची नहर सुबह शेखपुर चौराहे के पास टूट गई। इससे तेजी से पानी खेतों में घुस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देखते ही देखते खेत जलमग्न हो गए। कुछ खेतों में फूलों की खेती भी खराब हो गई। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम मौके पर पहुंची। बोर्ड ने तत्काल नहर की मरम्मत के लिए नगर निगम से कहा। सक्रिय हुए नगर निगम ने जल निगम (ग्रामीण) को पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि नहर क्षतिग्रस्त हो गई है। इसकी मरम्मत के लिए एसटीपी से उसमें पानी की आपूर्ति बंद करने के लिए कहा। जल निगम ने दोपहर 1:00 बजे एसटीपी के पंप बंद कराए। इससे शोधित पानी नहर के बजाय चोर नाले के माध्यम से सीधे गंगा में चला गया।
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कोट
नगर निगम के कहने पर दोपहर में एसटीपी से नहर में पानी छोड़ना बंद कर दिया गया। शोधित पानी गंगा में छोड़ना पड़ रहा है। नगर निगम से जल्द से जल्द मरम्मत कराने के लिए कहा है, ताकि शोधित पानी नहर में जाने लगे।
- मोहित चक, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)
एसटीपी के इरिगेशन चैनल की मरम्मत करा रहा हूं। इसके क्षतिग्रस्त हिस्से में बालू भरी बोरियां लगवाई जा रही है। देर रात तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
- दिवाकर भास्कर, प्रभारी अभियंता, जोन-दो, नगर निगम