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Bareilly News: फर्जी आईएएस ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों ठगे
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बरेली। ग्रेटर ग्रीन पार्क की निवासी फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवक से लाखों रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद काफी समय तक फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर टालमटोल करती रही। पीड़ित ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कालीबाड़ी निवासी सुनील यादव ने इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह को बताया कि वर्ष 2023 में विप्रा शर्मा एक लड़के को टाइपिंग सिखाने आती थी। विप्रा ने खुद को एसडीएम बताकर कहा कि इस लड़के की सरकारी नौकरी लग गई है। बस थोड़ा कंप्यूटर सिखा दें, फिर इसे तैनाती दिलवा देंगे। सुनील यादव ने विप्रा की बातों में आकर अपने भाई सुधीर यादव, जसवीर यादव और उसके दोस्त अरुण की नौकरी लगवाने के लिए साढ़े छह लाख रुपये उसे दे दिए। इसके बाद सभी के पते पर नियुक्ति पत्र आने लगे।
जैसे ही नियुक्ति की तिथि पास आती थी तो विप्रा नया नियुक्ति पत्र भेजकर आगे की तिथि बता देती थी। काफी समय बीतने पर जब विप्रा से रुपये लौटाने के लिए कहा तो बोली कि शिमला में ट्रेनिंग चल रही है। काफी मिन्नत करने पर ढाई लाख रुपये विप्रा ने उन्हें लौटा दिए। बकाया चार लाख रुपये मांगने पर वह बहाने बनाने लगी। अक्सर उनकी कॉल काट देती थी। अब उन्हें पता लगा है कि उसने उनके जैसे कई और लोगों से नौकरी के नाम पर ठगी कर ली है। एसएसपी के आदेश पर बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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29 मामले दर्ज, गैंगस्टर लगाने की तैयारी
सुनील यादव की हालिया रिपोर्ट के बाद बारादरी व अन्य थानों में कुल 29 रिपोर्ट विप्रा शर्मा और उसके गिरोह के खिलाफ दर्ज हो चुकी हैं। अब भी उसके खिलाफ कई शिकायतें कोर्ट में विचाराधीन हैं तो कई थाना स्तर पर जांच में लंबित हैं। चूंकि प्रशासनिक अधिकारियों के फोटो लगाकर भी विप्रा ने जनता को धोखा दिया तो डीएम ने भी एसएसपी से इस गिरोह के खिलाफ अधिकतम कार्रवाई करने के लिए कहा है। अब गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर व अन्य विधिक कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
वर्जन
विप्रा व उसकी दोनों बहनें जेल में हैं। इनके गिरोह के बाकी सदस्यों की भूमिका को लेकर विवेचना में स्थिति स्पष्ट होने के साथ उन पर भी कार्रवाई होगी। इन सभी की संपत्तियां भी चिह्नित की जा रही हैं। गैंगस्टर लगाने के साथ ही इनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
कालीबाड़ी निवासी सुनील यादव ने इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह को बताया कि वर्ष 2023 में विप्रा शर्मा एक लड़के को टाइपिंग सिखाने आती थी। विप्रा ने खुद को एसडीएम बताकर कहा कि इस लड़के की सरकारी नौकरी लग गई है। बस थोड़ा कंप्यूटर सिखा दें, फिर इसे तैनाती दिलवा देंगे। सुनील यादव ने विप्रा की बातों में आकर अपने भाई सुधीर यादव, जसवीर यादव और उसके दोस्त अरुण की नौकरी लगवाने के लिए साढ़े छह लाख रुपये उसे दे दिए। इसके बाद सभी के पते पर नियुक्ति पत्र आने लगे।
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जैसे ही नियुक्ति की तिथि पास आती थी तो विप्रा नया नियुक्ति पत्र भेजकर आगे की तिथि बता देती थी। काफी समय बीतने पर जब विप्रा से रुपये लौटाने के लिए कहा तो बोली कि शिमला में ट्रेनिंग चल रही है। काफी मिन्नत करने पर ढाई लाख रुपये विप्रा ने उन्हें लौटा दिए। बकाया चार लाख रुपये मांगने पर वह बहाने बनाने लगी। अक्सर उनकी कॉल काट देती थी। अब उन्हें पता लगा है कि उसने उनके जैसे कई और लोगों से नौकरी के नाम पर ठगी कर ली है। एसएसपी के आदेश पर बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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सुनील यादव की हालिया रिपोर्ट के बाद बारादरी व अन्य थानों में कुल 29 रिपोर्ट विप्रा शर्मा और उसके गिरोह के खिलाफ दर्ज हो चुकी हैं। अब भी उसके खिलाफ कई शिकायतें कोर्ट में विचाराधीन हैं तो कई थाना स्तर पर जांच में लंबित हैं। चूंकि प्रशासनिक अधिकारियों के फोटो लगाकर भी विप्रा ने जनता को धोखा दिया तो डीएम ने भी एसएसपी से इस गिरोह के खिलाफ अधिकतम कार्रवाई करने के लिए कहा है। अब गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर व अन्य विधिक कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
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विप्रा व उसकी दोनों बहनें जेल में हैं। इनके गिरोह के बाकी सदस्यों की भूमिका को लेकर विवेचना में स्थिति स्पष्ट होने के साथ उन पर भी कार्रवाई होगी। इन सभी की संपत्तियां भी चिह्नित की जा रही हैं। गैंगस्टर लगाने के साथ ही इनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी। - मानुष पारीक, एसपी सिटी