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Agra: कोर्ट का आदेश फिर भी रोका निर्माण, रिटायर्ड फौजियों ने रोक दी वन विभाग की टीम; जानें पूरा मामला
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 07 Feb 2026 09:58 AM IST
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सार
छलेसर के झरना नाले स्थित भूमि को लेकर शुक्रवार को विवाद बढ़ गया। निचली अदालत से फैसला होने के बावजूद वन विभाग की टीम पुलिस के साथ निजी भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाने पहुंची। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
गेट पर रोकी गई टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के छलेसर के झरना नाले स्थित भूमि को लेकर शुक्रवार को विवाद बढ़ गया। निचली अदालत से फैसला होने के बावजूद वन विभाग की टीम पुलिस के साथ निजी भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाने पहुंची। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। रिटायर्ड फौजियों के विरोध के बाद पुलिस गेट के बाहर करीब एक घंटे तक तैनात रही।
यह भूमि रिटायर्ड सूबेदार तहसीलदार सिंह ने अपनी पत्नी गोपाल देवी के नाम से खरीदी थी। कुल 2300 वर्ग मीटर में से 1400 वर्ग मीटर सड़क निर्माण में अधिग्रहित हो चुका है, जबकि शेष करीब 900 वर्ग मीटर भूमि निजी है। इस पर बाउंड्री और गेट बने हैं। अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस भूमि पर वन विभाग का कोई अधिकार नहीं है।
आरोप है कि बाउंड्री ऊंची करने के दौरान वन अधिकारियों ने बिना लिखित आदेश के अंदर प्रवेश का प्रयास किया। सूचना पर जिला सैनिक बंधु के ब्लॉक अध्यक्ष ललक सिंह परमार के नेतृत्व में फौजियों ने मौके पर पहुंचकर कोर्ट का आदेश दिखाया और हस्तक्षेप का विरोध किया। फौजियों ने इसे न्यायालय आदेश का उल्लंघन बताया। वहीं डिप्टी रेंजर महेंद्र सिंह का कहना है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और विभाग कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रहा है।
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यह भूमि रिटायर्ड सूबेदार तहसीलदार सिंह ने अपनी पत्नी गोपाल देवी के नाम से खरीदी थी। कुल 2300 वर्ग मीटर में से 1400 वर्ग मीटर सड़क निर्माण में अधिग्रहित हो चुका है, जबकि शेष करीब 900 वर्ग मीटर भूमि निजी है। इस पर बाउंड्री और गेट बने हैं। अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस भूमि पर वन विभाग का कोई अधिकार नहीं है।
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आरोप है कि बाउंड्री ऊंची करने के दौरान वन अधिकारियों ने बिना लिखित आदेश के अंदर प्रवेश का प्रयास किया। सूचना पर जिला सैनिक बंधु के ब्लॉक अध्यक्ष ललक सिंह परमार के नेतृत्व में फौजियों ने मौके पर पहुंचकर कोर्ट का आदेश दिखाया और हस्तक्षेप का विरोध किया। फौजियों ने इसे न्यायालय आदेश का उल्लंघन बताया। वहीं डिप्टी रेंजर महेंद्र सिंह का कहना है कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और विभाग कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रहा है।
छलेसर के झरना नाले स्थित भूमि को लेकर शुक्रवार को विवाद बढ़ गया। निचली अदालत से फैसला होने के बावजूद वन विभाग की टीम पुलिस के साथ निजी भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाने पहुंची। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।