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Agra News: सौरत्न माला परियोजना में 100 साहित्यकारों के जीवन पर बन रहीं पुस्तकें
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केंद्रीय हिंदी संस्थान
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आगरा। हिंदी साहित्य के प्रमुख रचनाकारों के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व को नई दृष्टि से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से केंद्रीय हिंदी संस्थान में सौरत्न माला परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत हिंदी साहित्य के इतिहास के देश के 100 प्रमुख साहित्यकारों का चयन कर उन पर पुस्तकें तैयार की जा रही हैं।
परियोजना का उद्देश्य हिंदी साहित्य की परंपरा को संजोना और नई पीढ़ी के सामने प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करना है। संयोजक प्रो. उमापति दीक्षित ने बताया कि साहित्यकारों का चयन पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका की अध्यक्षता में हिंदी साहित्य के आचार्यों एवं विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय चयन समिति ने किया है। इसमें करीब 20 विद्वान शामिल थे।
उन्होंने बताया कि हिंदी साहित्य के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 100 साहित्यकारों को इस योजना में शामिल किया गया है। प्रो. दीक्षित ने कहा कि इन पुस्तकों की विशेषता यह है कि इनमें केवल बाजार में उपलब्ध सामग्री का संकलन नहीं किया जा रहा, बल्कि देश के नामचीन साहित्यकारों और विद्वानों से चयन समिति की ओर से विषय देकर विशेष आलेख लिखवाए जा रहे हैं।
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इसका मार्गदर्शन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र दुबे कर रहे हैं l इससे साहित्यकारों के जीवन और रचनात्मक अवदान पर नई और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत शेष साहित्यकारों पर भी तेजी से कार्य चल रहा है।
दो पुस्तकें हो चुकीं प्रकाशित
‘सौरत्न माला’ परियोजना के अंतर्गत अब तक दो पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। पहली पुस्तक गोरखनाथ और दूसरी पुस्तक पंडित विद्यानिवास मिश्र पर है l वहीं, पांच अन्य साहित्यकारों तुलसीदास, कबीरदास, प्रेमचंद, निराला एवं जयशंकर प्रसाद पर आधारित पुस्तकें अंतिम चरण में हैं और जल्द प्रकाशित की जाएंगी। इसके बाद चयनित शेष 93 साहित्यकारों पर भी लेखन और संपादन का कार्य लगातार जारी रहेगा।
परियोजना का उद्देश्य हिंदी साहित्य की परंपरा को संजोना और नई पीढ़ी के सामने प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करना है। संयोजक प्रो. उमापति दीक्षित ने बताया कि साहित्यकारों का चयन पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका की अध्यक्षता में हिंदी साहित्य के आचार्यों एवं विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय चयन समिति ने किया है। इसमें करीब 20 विद्वान शामिल थे।
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उन्होंने बताया कि हिंदी साहित्य के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 100 साहित्यकारों को इस योजना में शामिल किया गया है। प्रो. दीक्षित ने कहा कि इन पुस्तकों की विशेषता यह है कि इनमें केवल बाजार में उपलब्ध सामग्री का संकलन नहीं किया जा रहा, बल्कि देश के नामचीन साहित्यकारों और विद्वानों से चयन समिति की ओर से विषय देकर विशेष आलेख लिखवाए जा रहे हैं।
इसका मार्गदर्शन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र दुबे कर रहे हैं l इससे साहित्यकारों के जीवन और रचनात्मक अवदान पर नई और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत शेष साहित्यकारों पर भी तेजी से कार्य चल रहा है।
दो पुस्तकें हो चुकीं प्रकाशित
‘सौरत्न माला’ परियोजना के अंतर्गत अब तक दो पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। पहली पुस्तक गोरखनाथ और दूसरी पुस्तक पंडित विद्यानिवास मिश्र पर है l वहीं, पांच अन्य साहित्यकारों तुलसीदास, कबीरदास, प्रेमचंद, निराला एवं जयशंकर प्रसाद पर आधारित पुस्तकें अंतिम चरण में हैं और जल्द प्रकाशित की जाएंगी। इसके बाद चयनित शेष 93 साहित्यकारों पर भी लेखन और संपादन का कार्य लगातार जारी रहेगा।