मोबाइल कंपनियां दे रही हैं फ्री क्लाउड स्टोरेज
अब सभी मोबाइल कंपनियां फ्री क्लाउड स्टोरेज दे रही हैं और फ्री क्लाउड स्टोरेज देकर वो ग्राहकों को दूसरे नेटवर्क पर जाने से रोकना चाहती हैं। टेलीकॉम कंपनियां अब आपके स्मार्टफोन के लिए स्टोरेज की जगह बांट रही हैं। रिलायंस जिओ, एयरटेल और वोडाफोन जैसी कंपनियां अपने ग्राहकों को अपने पास बांध कर रखने के लिए क्लाउड स्टोरेज का हथकंडा अपना रही हैं।
कंपनियों को क्लाउड स्टोरेज देने से ये फायदा होता है कि कोई भी सब्सक्राइबर उस डेटा को छोड कर दूसरे नेटवर्क पर नहीं जा सकता है। इसमें उनके फोटो हो सकते हैं या उनके पसंदीदा गानों का कलेक्शन। अब 'जिओ क्लाउड' या 'एयरटेल बैक अप' सभी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के ऑनलाइन स्टोरेज का बढिया विकल्प लेकर आये हैं।
रिलायंस जिओ पर आपको 5 गीगाबाइट का स्टोरेज मिलता है लेकिन एयरटेल पर सिर्फ 2 गीगाबाइट का स्टोरेज मिलता है। अपने फोटो, म्यूजिक, विडियो के अलावा कॉल लॉग का भी बैक अप दोनों पर रखा जा सकता है। दोनों कंपनियां चाहती हैं कि अपने स्मार्टफोन पर आप उनके ऐप डाउनलोड करें। अगर एयरटेल के ऐप के जरिये रात को आप क्लाउड सर्विस के लिए डेटा अपलोड करते हैं तो उसे आप फ्री कर सकते हैं।
देश में 100 करोड से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले हैं
वोडाफोन पर भी ये सर्विस मिलेंगीं लेकिन ये छोटे बिजनस के लिए बनाये गए हैं। इसलिए ऐसी छोटी कंपनी के ईमेल, वेबसाइट और दूसरी क्लाउड सर्विस के लिए वोडाफोन की सर्विस मिलती है। गूगल के साथ मिलकर गूगल के सभी ऐप इस सर्विस के साथ काम करेंगे। वोडाफोन ने ऐसी सर्विस के लिए ऑनलाइन स्टोरेज कंपनी ड्रॉपबॉक्स से करार भी किया है।
क्लाउड सर्विस में ग्राहकों को अपने स्मार्टफोन या उसके एसडी कार्ड पर डेटा स्टोर करने की जरुरत नहीं होती है। इसलिए उनके फोटो, विडियो और म्यूजिक को स्टोर करके कहीं भी उसे डाउनलोड करना बहुत आसान हो जाता है। मोबाइल फोन के बाजार में अब नए ग्राहक ढूंढना बहुत मुश्किल है क्योंकि अब सभी बडे शहरों में सभी के पास मोबाइल फोन हैं।
जैसे जैसे स्मार्टफोन का बाजार बढ़ रहा हैं उसे देखते हुए मोबाइल फोन कंपनियां चाहती हैं कि जो नए लोग स्मार्टफोन खरीद रहे हैं वो हर सर्विस के लिए डेटा का इस्तेमाल करें। इससे उन कंपनियों को अपने वायरलेस इंटरनेट के लिए हमेशा ग्राहक मिलते रहेंगे। देश में 100 करोड से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले हैं और उनमें 90 फीसदी लोग प्रीपेड सर्विस के ग्राहक हैं।