सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   political situation in himachal is not like uttrakhand.

वीरभद्र के खिलाफ है एक गुट, मगर नहीं है उत्तराखंड जैसे हालात

ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 29 Mar 2016 10:21 AM IST
विज्ञापन
 political situation in himachal is not like uttrakhand.
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
विज्ञापन

भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस में काली भेड़ों (ब्लैकशिप) की पुरानी प्रथा है। तो सवाल उठता है कि कांग्रेस में वे काली भेड़ें कौन-कौन सी हैं जो वीरभद्र सिंह सरकार को गिराना चाहती हैं। धूमल के सम्पर्क में वाकई कांग्रेसी विधायक हैं या फिर वे सरकार पर दबाव बनाने की राजनीति खेल रहे हैं? सच्चाई क्या है ये वक्त बताएगा।

Trending Videos


लेकिन सच यह है कि यहां उत्तराखंड जैसे राजनीतिक हालात नहीं है। भाजपा का दावा है कि उत्तराखंड का सियासी तूफान हिमाचल में वीरभद्र सरकार को भी उड़ा ले जाएगा। पर कांग्रेस का कहना है कि ये हवाई बातें हैं। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की एनडीए सरकार राज्य की कांग्रेस सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ ईडी की कार्रवाई को हथियार बनाकर विपक्ष में बैठी भाजपा सीएम के इस्तीफे की मांग कर रही है। विधानसभा के भीतर इस मसले पर चर्चा के लिए अड़े भाजपा विधायकों ने सोमवार को सदन में खूब हंगामा किया। इसी बीच, प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस भी सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

सीएम वीरभद्र के खिलाफ है पार्टी का एक गुट

 political situation in himachal is not like uttrakhand.
पार्टी का एक गुट (सात से आठ विधायक) मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ गुपचुप तरीके से सक्रिय है।

एक सच ये भी है कि प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस भी भले ही हिमाचल में एकजुट होने का दावा कर रही हो, पर पार्टी का एक गुट (सात से आठ विधायक) मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ गुपचुप तरीके से सक्रिय है।

सूत्रों की मानें तो इस गुट के विधायक दबे स्वरों में नेतृत्व परिवर्तन की बातें जरूर कर रहे हैं लेकिन वे अपना वजूद कांग्रेस के भीतर ही तलाश रहे हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पास अपने 36 विधायक हैं, जबकि चार निर्दलीय विधायकों का भी सरकार को समर्थन प्राप्त है।

विपक्ष में बैठी भाजपा के पास कुल 27 विधायक हैं। हिमाचल लोकहित पार्टी का एक ही एमएलए है। कुल 68 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 35 है। ऐसे में अगर एक गुट में असंतोष है तो कांग्रेस के लिए चिन्ता की बात है।

गुटबाजी के बाद भी ये बन रहे हैं हालात

 political situation in himachal is not like uttrakhand.
पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुट भी ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के बावजूद अभी तक सीएम के साथ ही खड़ा दिखा है। - फोटो : अमर उजाला

दिसंबर 2012 को सत्ता में आने से पहले हिमाचल में कांग्रेस कई गुटों में बंटी थी। कांग्रेस की तमाम गुटबाजी को पाटते हुए वीरभद्र छठी बार मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस 36 विधायकों के साथ सत्ता में आई। पांच निर्दलीय विधायकों का भी सरकार को साथ मिला। शुरू में भाजपा के पास 26 विधायक थे।

बाद में निर्दलीय विधायक राजेंद्र राणा ने हमीरपुर से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा तो सुजानपुर उपचुनाव में भाजपा की जीत हुई। भाजपा विधायकों की संख्या 26 से बढ़कर 27 हो गई। भाजपा नेता कई बार यह दावे कर चुके हैं कि कांग्रेस के कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं, मगर इन तमाम दावों के बीच सरकार को साढ़े तीन साल हो गए हैं।

68 सदस्यों वाली हिमाचल की बारहवीं विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 35 विधायकों की जरूरत है, जबकि सत्तासीन कांग्रेस का आंकड़ा इससे एक विधायक ज्यादा है। चार निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस सरकार के साथ खड़े हैं। पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुट भी ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के बावजूद अभी तक सीएम के साथ ही खड़ा दिखा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed