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सड़क चौड़ीकरण की जद में आई नूरानी मस्जिद: विध्वंस के खिलाफ एकजुट हुआ समाज, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 07:55 PM IST
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जयपुर में नूरानी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज ने जुम्मे की नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध जताया। समुदाय के प्रतिनिधियों ने संवाद और कानूनी प्रक्रिया की मांग की, जबकि प्रशासन ने कार्रवाई को नियमानुसार बताया है।
जयपुर में नूरानी मस्जिद हटाने की कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज ने जुम्मे की नमाज
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
जयपुर में नूरानी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को मुस्लिम समाज एकजुट नजर आया। शहर के मुसाफिरखाने में जुम्मे की नमाज के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर नमाज अता की और प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। समुदाय के लोगों ने बताया कि काली पट्टी उनके विरोध के साथ-साथ दुख और चिंता का भी प्रतीक है।
आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है
नमाज के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार के टकराव या अशांति के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि कानूनी और संस्थागत माध्यमों से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रतिनिधियों का कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को सभी पक्षों की बात सुनते हुए पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
नूरानी मस्जिद से जुड़ी हैं धार्मिक भावनाएं
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि नूरानी मस्जिद को हटाने का मामला केवल एक निर्माण या अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद, सहमति और कानूनी प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो।
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गौरतलब है कि, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने हाल ही में जगतपुरा-नंदपुरी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत नूरानी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रस्तावित सड़क परियोजना को आगे बढ़ाने और सार्वजनिक हित में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए थे।
ये भी पढ़ें- अश्विनी वैष्णव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंधेरा: अचानक बिजली जाने से मचा हड़कंप, मंत्री ने दिए जांच के आदेश
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आईं सामने
इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस से जुड़े कुछ मुस्लिम विधायकों और नेताओं ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मामला किसी धार्मिक स्थल से संबंधित था तो संबंधित पक्षों को पर्याप्त नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। वहीं राजस्थान वक्फ बोर्ड ने भी कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताते हुए कानूनी पहलुओं की समीक्षा की मांग की है।
हालांकि, प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। वहीं मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों से दूर रहने और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी प्रक्रियाओं और धार्मिक संवेदनाओं के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है
नमाज के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार के टकराव या अशांति के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि कानूनी और संस्थागत माध्यमों से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रतिनिधियों का कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को सभी पक्षों की बात सुनते हुए पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
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नूरानी मस्जिद से जुड़ी हैं धार्मिक भावनाएं
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि नूरानी मस्जिद को हटाने का मामला केवल एक निर्माण या अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद, सहमति और कानूनी प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो।
गौरतलब है कि, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने हाल ही में जगतपुरा-नंदपुरी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत नूरानी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रस्तावित सड़क परियोजना को आगे बढ़ाने और सार्वजनिक हित में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए थे।
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राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं आईं सामने
इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस से जुड़े कुछ मुस्लिम विधायकों और नेताओं ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मामला किसी धार्मिक स्थल से संबंधित था तो संबंधित पक्षों को पर्याप्त नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। वहीं राजस्थान वक्फ बोर्ड ने भी कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताते हुए कानूनी पहलुओं की समीक्षा की मांग की है।
हालांकि, प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। वहीं मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों से दूर रहने और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी प्रक्रियाओं और धार्मिक संवेदनाओं के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।