{"_id":"56faafdb4f1c1b3448f002ee","slug":"sadhu-singh-dhramsot-congress-leader-jagmeet-singh-jalandhar","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांग्रेस से धोखा यानी पंजाब की जनता से गद्दारी ः धर्मसोत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांग्रेस से धोखा यानी पंजाब की जनता से गद्दारी ः धर्मसोत
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Tue, 29 Mar 2016 10:10 PM IST
विज्ञापन
जालंधर में पत्रकारों से बातचीत करते साधु सिंह धर्मसोत।
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कांग्रेसी विधायक व कैंपेन कमेटी के वाइस चेयरमैन साधू सिंह धर्मसोत ने पार्टी में बागी सुर उठाने वाले पूर्व सांसद जगमीत सिंह बराड़ को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ धोखा यानी पंजाब की जनता के साथ गद्दारी।
उन्होंने कहा कि जगमीत बराड़ को जो कुछ भी मिला वह कांग्रेस से ही मिला है। साधू सिंह मंगलवार को जालंधर में कांग्रेसी नेता यशपाल धीमान के निवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उनके साथ पीपीसीसी सचिव वरिंदर शर्मा, इंटक के महासचिव अशोक गुप्ता भी मौजूद थे।
पिछले दिनों विधानसभा में विपक्ष के नेता चरणजीत सिंह चन्नी के बयान पर उड़ी खिल्ली की बात पर साधू सिंह धर्मसोत ने कहा कि वह उस दिन विधानसभा में नहीं थे। चन्नी काबिल नेता है और पार्टी ने उनको विपक्ष की जिम्मेदारी दी है। पार्टी की तरफ से जो लीडर प्रधान बनाया जाता है कांग्रेसी वर्करों व नेताओं के लिए मान्य होता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में एसवाईएल का नोटिफिकेशन पंजाब के सीएम बादल ने ही 1978 में किया था। हरियाणा सरकार से बाकायदा दो करोड़ रुपये सर्वे के लिए लिए थे। अब भी जब विधानसभा में पानी संबंधी बिल पारित हुआ तो सीएम बादल ने राज्यपाल को सात दिन तक नहीं भेजा ताकि हरियाणा व केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस पर स्टे प्राप्त कर लें।
साधू सिंह ने खुलासा किया कि जब कांग्रेसी विधायक बादल के साथ राज्यपाल के पास बिल पारित करवाने के लिए गए तो उल्टा राज्यपाल ने बादल से पूछा कि बिल है कहां उसको भेज तो दो लेकिन बिल को विधानसभा में पास करने के बावजूद लटका कर रखा गया ताकि राजनीतिक ड्रामा कर वोट बैंक को सहेजा जा सके।
Trending Videos
उन्होंने कहा कि जगमीत बराड़ को जो कुछ भी मिला वह कांग्रेस से ही मिला है। साधू सिंह मंगलवार को जालंधर में कांग्रेसी नेता यशपाल धीमान के निवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उनके साथ पीपीसीसी सचिव वरिंदर शर्मा, इंटक के महासचिव अशोक गुप्ता भी मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले दिनों विधानसभा में विपक्ष के नेता चरणजीत सिंह चन्नी के बयान पर उड़ी खिल्ली की बात पर साधू सिंह धर्मसोत ने कहा कि वह उस दिन विधानसभा में नहीं थे। चन्नी काबिल नेता है और पार्टी ने उनको विपक्ष की जिम्मेदारी दी है। पार्टी की तरफ से जो लीडर प्रधान बनाया जाता है कांग्रेसी वर्करों व नेताओं के लिए मान्य होता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में एसवाईएल का नोटिफिकेशन पंजाब के सीएम बादल ने ही 1978 में किया था। हरियाणा सरकार से बाकायदा दो करोड़ रुपये सर्वे के लिए लिए थे। अब भी जब विधानसभा में पानी संबंधी बिल पारित हुआ तो सीएम बादल ने राज्यपाल को सात दिन तक नहीं भेजा ताकि हरियाणा व केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस पर स्टे प्राप्त कर लें।
साधू सिंह ने खुलासा किया कि जब कांग्रेसी विधायक बादल के साथ राज्यपाल के पास बिल पारित करवाने के लिए गए तो उल्टा राज्यपाल ने बादल से पूछा कि बिल है कहां उसको भेज तो दो लेकिन बिल को विधानसभा में पास करने के बावजूद लटका कर रखा गया ताकि राजनीतिक ड्रामा कर वोट बैंक को सहेजा जा सके।