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Telegram Ban: टेलीग्राम को पहले ही किया था आगाह, नहीं माने तो लगा बैन; NTA ने बताई पूरी कहानी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:28 PM IST
NEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नई जानकारी सामने आई है। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का कहना है कि सरकार ने Telegram को पहले ही कुछ फीचर्स के दुरुपयोग को लेकर आगाह किया था, लेकिन कंपनी ने जरूरी बदलाव नहीं किए। वहीं, इस फैसले ने परीक्षा की निष्पक्षता और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच नई बहस छेड़ दी है।
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टेलीग्राम
- फोटो : अमर उजाला
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NEET री-एग्जाम से ठीक पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बड़ा बयान दिया है। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का कहना है कि सरकार ने Telegram को पहले ही उसके कुछ फीचर्स के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन कंपनी ने समय रहते जरूरी बदलाव नहीं किए। इसके बाद सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े।
Telegram App
- फोटो : FREEPIK
क्यों लिया गया यह फैसला?
- अभिषेक सिंह के मुताबिक, सरकार का मुख्य उद्देश्य NEET री-एग्जाम से पहले फैलाए जा रहे फर्जी पेपर लीक के दावों पर रोक लगाना है। ऐसे दावे छात्रों के बीच डर और भ्रम पैदा कर रहे थे।
- उन्होंने बताया कि Telegram के वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च स्तर की बैठकों में बुलाकर दो प्रमुख समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया था। पहली, एडिट किए गए मैसेज के टाइमस्टैम्प को स्पष्ट रूप से दिखाने की जरूरत और दूसरी, ग्रुप्स के नामों पर सख्त नियंत्रण की कमी। लेकिन Telegram ने उस समय अपने सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।
टेलीग्राम सीईओ पावेल दुरोव (फाइल)
- फोटो : एएनआई
कैसे फैलाया जाता था फर्जी पेपर लीक का भ्रम?
- NTA के अनुसार, कुछ लोग Telegram के ग्रुप और चैनल सिस्टम की एक तकनीकी खामी का फायदा उठा रहे थे। इस तरीके में कोई व्यक्ति परीक्षा से कई दिन पहले एक सार्वजनिक Telegram चैनल पर कोई सामान्य PDF अपलोड कर देता था और उसका नाम "NEET Question Paper Leaked" जैसा भड़काऊ रख देता था। परीक्षा होने के बाद वही व्यक्ति Telegram के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर उस फाइल को असली प्रश्नपत्र से बदल देता था।
- चैनल पर पोस्ट के साथ "Edited" का टैग तो दिखाई देता था, लेकिन उससे जुड़े ग्रुप में पुराना टाइमस्टैम्प बना रहता था। इससे ऐसा लगता था कि असली प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही उपलब्ध था। इसी वजह से छात्रों और अभिभावकों के बीच घबराहट फैल जाती थी।
Telegram ने क्या जवाब दिया?
- Telegram के संस्थापक पावेल डुरोव ने हाल ही में X पर कहा था कि कंपनी एडिट किए गए मैसेज को अधिक स्पष्ट रूप से दिखाने के लिए बदलाव कर रही है ताकि इस तरह की धोखाधड़ी रोकी जा सके। हालांकि, अभिषेक सिंह का कहना है कि फिलहाल एप में ऐसा कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
- उन्होंने सवाल उठाया कि Telegram अपने मेटाडाटा सिस्टम में ऐसा बदलाव क्यों नहीं करता जिससे एडिट होने के बाद जुड़े हुए ग्रुप्स में भी सही समय दिखाई दे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
'पेपर लीक माफिया' जैसे नामों पर भी आपत्ति
- NTA प्रमुख ने यह भी कहा कि Telegram पर "Paper Leak NEET Mafia" जैसे नामों वाले ग्रुप आसानी से बनाए जा सकते हैं। उनका मानना है कि किसी भी प्लेटफॉर्म को देश के नियमों का पालन करना चाहिए और ऐसे संदिग्ध नामों पर रोक लगानी चाहिए।
- उनके मुताबिक, कमजोर नामकरण नियंत्रण और यूजर्स की पहचान छिपाने की सुविधा ने Telegram को कथित तौर पर पेपर लीक, निवेश धोखाधड़ी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों का केंद्र बना दिया है।
दूसरी तरफ उठ रहे हैं सवाल
- IIT कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग हो रहा है और उससे फर्जी खबरें फैल रही हैं, तो कंपनी को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए और जरूरी बदलाव करने चाहिए।
- वहीं IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने चेतावनी दी कि किसी प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से समस्या खत्म नहीं होती। उनका कहना है कि गलत इरादे वाले लोग दूसरे और ज्यादा गुप्त प्लेटफॉर्म्स पर चले जाएंगे, जिससे उन पर नजर रखना और मुश्किल हो जाएगा।
- उन्होंने यह भी कहा कि Telegram जैसे बड़े प्लेटफॉर्म के लिए एडिटिंग या आर्काइविंग जैसे मूल फीचर्स में तुरंत बदलाव करना तकनीकी रूप से आसान नहीं होता।
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Telegram App
- फोटो : FREEPIK
IFF ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
- इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने Telegram पर प्रतिबंध को "अस्थायी और असंतुलित समाधान" बताया है। संगठन का कहना है कि कानून सरकार को किसी विशेष सामग्री को ब्लॉक करने की अनुमति देता है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने या किसी कंपनी को अपना उत्पाद बदलने के लिए मजबूर करने का अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं देता।
- IFF का तर्क है कि Telegram लाखों छात्रों के लिए पढ़ाई, चर्चा और नोट्स साझा करने का माध्यम भी है। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले प्रतिबंध लगाने से सामान्य उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंच सकता है।
- संगठन ने यह भी कहा कि पेपर लीक की असली समस्या सिस्टम के भीतर मौजूद कमियों, प्रिंटिंग और वितरण प्रक्रिया से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में केवल Telegram को बंद करना मूल समस्या से ध्यान भटकाने जैसा है।
- IFF ने मांग की है कि सरकार Telegram पर प्रतिबंध लगाने के आदेश और NTA की सिफारिशों को सार्वजनिक करे ताकि लोगों को इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट रूप से पता चल सके।