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नींद में डरते हैं तो यह उपाय है कारगर
Updated Thu, 26 Sep 2013 12:05 PM IST
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अमरीकी शोधकर्ताओं का कहना है कि नींद में कुछ ख़ास गंध का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति के डर को दूर किया जा सकता है।
इसके लिए लोगों को गंध और डर से संबंधित दो छवियों से जुड़ाव स्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
नींद के दौरान उन्हें एक छवि से संबंधित गंध सुंघाई गई और जब वो उठे तो वो उस गंध से संबंधित छवि से कम भयभीत थे।
नींद नहीं आती है तो आजमाएं ये आसान उपाय
ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ ने इस अध्ययन की प्रशंसा करते हुए कहा है कि इससे डर का इलाज करने में मदद मिलेगी और शायद यह पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) में भी लाभप्रद हो।
पीटीएसडी में यौन दुर्व्यवहार, गंभीर चोट और हत्या की धमकी जैसी घटनाएं शामिल हैं।
अच्छी नींद चाहिए तो इन आदतों को बदलें
नींद में इलाज
आमतौर पर ऐसे लोगों का इलाज जागते हुए किया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञों की निगरानी में उनसे उनके डर का सामना कराया जाता है।
यह अध्ययन बताता है कि ये इलाज गहरी नींद में भी किया जा सकता है। इस अवस्था में भावनात्मक स्मृति को बदलने के बारे में चिंतन किया जाता है।
7 मिथः नींद के लिए आप भी तो नहीं करते हैं ड्रिंक?
शोधकर्ताओं ने 15 स्वस्थ लोगों को दो अलग-अलग चेहरों की तस्वीरें दिखाईं।
उसी समय उन्हें हल्का इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया। साथ ही उन्हें नींबू, पुदीना, लौंग या चंदन जैसी कोई खास गंध सुँघाई गई।
इसके बाद उन्हें एक शयन प्रयोगशाला में ले जाया गया। जब वो गहरी नींद में आ गए तो उन्हें दिखाए गए एक चेहरे से संबंधित गंध सुँघाई गई।
डर से डरना कैसा
जो लोग अधिक गहरी नींद लेते हैं, उनके डर का बेहतर ढंग से इलाज किया जा सकता है।
इसके बाद जब वो जागे तो उन्हें बिना किसी गंध या झटके के दोनों चेहरे दिखाए गए।
उन्होंने उस चेहरे से कम डर महसूस किया, जिससे संबंधित गंध उन्हें सोने के दौरान सुँघाई गई थी।
लोग आम तौर पर पांच मिनट से 40 मिनट तक गहरी नींद लेते हैं और इस प्रयोग का असर उन लोगों में अधिक देखा गया जिन्होंने अधिक समय तक गहरी नींद ली।
इस अध्ययन की अगुवाई कर रही शिकागो स्थित नार्थवेस्टर्न यूनीवर्सिटी फ़ीनबर्ग स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की कैथरीना हॉनर ने कहा, "यह एक अद्भुत खोज है। हमने पाया कि डर में थोड़ी लेकिन महत्वपूर्ण कमी हुई।"
उन्होंने कहा, "बड़ी बात ये है कि अगर पहले से मौजूद डर पर इसका इस्तेमाल किया जाए तो शायद नींद के दौरान डर का इलाज बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।"
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इसके लिए लोगों को गंध और डर से संबंधित दो छवियों से जुड़ाव स्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
नींद के दौरान उन्हें एक छवि से संबंधित गंध सुंघाई गई और जब वो उठे तो वो उस गंध से संबंधित छवि से कम भयभीत थे।
नींद नहीं आती है तो आजमाएं ये आसान उपाय
ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ ने इस अध्ययन की प्रशंसा करते हुए कहा है कि इससे डर का इलाज करने में मदद मिलेगी और शायद यह पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) में भी लाभप्रद हो।
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पीटीएसडी में यौन दुर्व्यवहार, गंभीर चोट और हत्या की धमकी जैसी घटनाएं शामिल हैं।
अच्छी नींद चाहिए तो इन आदतों को बदलें
नींद में इलाज
आमतौर पर ऐसे लोगों का इलाज जागते हुए किया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञों की निगरानी में उनसे उनके डर का सामना कराया जाता है।
यह अध्ययन बताता है कि ये इलाज गहरी नींद में भी किया जा सकता है। इस अवस्था में भावनात्मक स्मृति को बदलने के बारे में चिंतन किया जाता है।
7 मिथः नींद के लिए आप भी तो नहीं करते हैं ड्रिंक?
शोधकर्ताओं ने 15 स्वस्थ लोगों को दो अलग-अलग चेहरों की तस्वीरें दिखाईं।
उसी समय उन्हें हल्का इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया। साथ ही उन्हें नींबू, पुदीना, लौंग या चंदन जैसी कोई खास गंध सुँघाई गई।
इसके बाद उन्हें एक शयन प्रयोगशाला में ले जाया गया। जब वो गहरी नींद में आ गए तो उन्हें दिखाए गए एक चेहरे से संबंधित गंध सुँघाई गई।
डर से डरना कैसा
जो लोग अधिक गहरी नींद लेते हैं, उनके डर का बेहतर ढंग से इलाज किया जा सकता है।
इसके बाद जब वो जागे तो उन्हें बिना किसी गंध या झटके के दोनों चेहरे दिखाए गए।
उन्होंने उस चेहरे से कम डर महसूस किया, जिससे संबंधित गंध उन्हें सोने के दौरान सुँघाई गई थी।
लोग आम तौर पर पांच मिनट से 40 मिनट तक गहरी नींद लेते हैं और इस प्रयोग का असर उन लोगों में अधिक देखा गया जिन्होंने अधिक समय तक गहरी नींद ली।
इस अध्ययन की अगुवाई कर रही शिकागो स्थित नार्थवेस्टर्न यूनीवर्सिटी फ़ीनबर्ग स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की कैथरीना हॉनर ने कहा, "यह एक अद्भुत खोज है। हमने पाया कि डर में थोड़ी लेकिन महत्वपूर्ण कमी हुई।"
उन्होंने कहा, "बड़ी बात ये है कि अगर पहले से मौजूद डर पर इसका इस्तेमाल किया जाए तो शायद नींद के दौरान डर का इलाज बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।"