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12वीं की परीक्षा के लिए कई स्कूलों को नहीं मिले 12 भी स्टूडेंट्स

Updated Mon, 07 Sep 2015 03:24 PM IST
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schools not got atleast 12 students of class 12 exam
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यूपी की राजधानी लखनऊ में भवन और शिक्षक होने के बावजूद राजधानी के कई अनुदानित कॉलेजों का बुरा हाल है। राजधानी के कई अनुदानित विद्यालयों का ऐसा ही हाल है। हालत यह है कि इस इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा के लिए कई अनुदानित कॉलेजों से 12 परीक्षा फॉर्म भी नहीं भरे गए हैं।

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हाईस्कूल के स्टूडेंट्स की हालत भी बहुत अच्छी नहीं हैं।
राजधानी में एक ओर निजी कॉलेज संचालक मान्यता लेने के लिए परेशान हैं। यहां तक कि गली-कूचों में चलने वाले बगैर मान्यता वाले कॉलेजों में भी हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं।
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इसके बावजूद राजधानी के इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में 10वीं में 10 और इंटरमीडिएट में सात, वैदिक कन्या गर्ल्स में हाईस्कूल में 16 और इंटरमीडिएट में 17, गांधी विद्यालय में हाईस्कूल में 4 और इंटर में 9, दुर्गा गीता हायर सेकेंड्री में 13, रेलवे हायर सेकेंड्री स्कूल में हाईस्कूल में 26, स्वतंत्र गर्ल्स इंटर कॉलेज में हाईस्कूल में 15 और इंटर में 12 और विद्यामंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में हाईस्कूल में 17 परीक्षार्थी ही पंजीकृत हैं।

साल दर साल राजधानी के अनुदानित स्कूलों में छात्र संख्या घटती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी लापरवाही के साथ ही इसके लिए विद्यालय प्रबंधन और शिक्षक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।

आठवीं तक मिलती है नि:शुल्क शिक्षा

schools not got atleast 12 students of class 12 exam

एक ओर जहां निजी स्कूल मोटी फीस लेकर अपने यहां छात्रों को भर्ती करते हैं वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में नाममात्र की फीस ली जाती है। यहां तक कि अनुदानित स्कूलों में आठवीं तक कोई फीस नहीं ली जाती है। इसके बावजूद छात्र संख्या है कि घटती जा रही है।

अनुदानित स्कूलों में सरकार केवल शिक्षकों का वेतन देती है। स्कूल के भवन जर्जर हैं और सामान्य सुविधाएं भी नदारद हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को अनुदानित स्कूलों में नहीं भेजना चाहते हैं। सरकार अनुदानित स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं बढ़ाएं तो यहां की छात्र संख्या भी निजी स्कूलों से बेहतर होगी।
डॉ.आरपी मिश्रा,प्रदेशीय प्रवक्ता एवं मंत्री,उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ

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