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अपराध खत्म करने के लिए अपराधियों की 'खुशामद' में जुटी पुलिस

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 01 Apr 2016 07:45 PM IST
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सार

  • अपराध खत्म करने के लिए अपराधियों की खुशामद
  • पुलिस वाले अपराधियों को पकड़ेंगे ही नहीं सुधारेंगे भी
  • क्या रंग ला पाएगी पुलिस की ये मुहिम?

Aurangabad police have begun a criminal adoption scheme
पुलिस की मुहिम से होगा समाज का भला? - फोटो : demo
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विस्तार

बहुत ही आम जुमला है कि 'अपराधी कोई पेट से नहीं आता, समाज की कुछ दुश्वारियां भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।' व्यवहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये बात एकदम सच लगती है। शायद इसीलिए औरंगाबाद पुलिस ने फैसला लिया कि अपराध को खत्म करने के लिए अपराधियों को खत्म करने के बजाय उन्हें सुधारेंगे। 

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जाहिर है जब अपराधी ही सुधर जाएंगे तो अपराध करने वाले होंगे ही नहीं और समाज में चैन-अमन के साथ लोग गुजर-बसर कर सकेंगे। मौजूदा हालात में ये बात हालांकि बड़ी है दूर की कौड़ी लगती है लेकिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जो कोशिश शुरू हुई है वो काबिल-ए-तारीफ है। 
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दूसरे सूबों की पुलिस को भी औरंगाबाद पुलिस की 'क्रिमिनल अडॉप्शन स्कीम' की सराहना करनी चाहिए और आत्मसात भी।

अपराध खत्म करने के लिए अपराधियों की खुशामद

Aurangabad police have begun a criminal adoption scheme
क्या रंग ला पाएगी पुलिस की ये मुहिम? - फोटो : demo

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक 85 पुलिस थानो में पुलिस ये प्रयोग कर रही है जहां सिपाहियों समेत तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उन अपराधियों की देखभाल करेंगे जिन्हें सुधारा जा सकता है और जिनके जरिए अपराध जगत की गूढ़ जानकारियां जुटाकर बारीकी से काम किया जाएगा।

पुलिस की इस मुहिम के तहत औरंगाबाद रेंज के औरंगबाद (ग्रामीण), जालना, बीड और ओसमानाबाद इलाके आएंगे।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल जमीन विवाद और शारीरिक यातनाओं से जुड़े आपराधों में लिप्त अपराधियों को इस मुहिम के तहत चुना गया है। ऐसी ही मुहिम औरंगाबाद के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने काफी पहले चालू की थी, जिसे उन्होंने तबादले के बाद भी जारी रखा। 

पुलिस के मुताबिक 175 पुलिस अधिकारियों के अलावा 1,938 सिपाहियों ने अपराधियों की काउंसलिंग का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद है पुलिस की ये मुहिम रंग लाएगी।

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