अपराध खत्म करने के लिए अपराधियों की 'खुशामद' में जुटी पुलिस
- अपराध खत्म करने के लिए अपराधियों की खुशामद
- पुलिस वाले अपराधियों को पकड़ेंगे ही नहीं सुधारेंगे भी
- क्या रंग ला पाएगी पुलिस की ये मुहिम?
विस्तार
बहुत ही आम जुमला है कि 'अपराधी कोई पेट से नहीं आता, समाज की कुछ दुश्वारियां भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।' व्यवहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये बात एकदम सच लगती है। शायद इसीलिए औरंगाबाद पुलिस ने फैसला लिया कि अपराध को खत्म करने के लिए अपराधियों को खत्म करने के बजाय उन्हें सुधारेंगे।
जाहिर है जब अपराधी ही सुधर जाएंगे तो अपराध करने वाले होंगे ही नहीं और समाज में चैन-अमन के साथ लोग गुजर-बसर कर सकेंगे। मौजूदा हालात में ये बात हालांकि बड़ी है दूर की कौड़ी लगती है लेकिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जो कोशिश शुरू हुई है वो काबिल-ए-तारीफ है।
दूसरे सूबों की पुलिस को भी औरंगाबाद पुलिस की 'क्रिमिनल अडॉप्शन स्कीम' की सराहना करनी चाहिए और आत्मसात भी।
अपराध खत्म करने के लिए अपराधियों की खुशामद
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक 85 पुलिस थानो में पुलिस ये प्रयोग कर रही है जहां सिपाहियों समेत तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उन अपराधियों की देखभाल करेंगे जिन्हें सुधारा जा सकता है और जिनके जरिए अपराध जगत की गूढ़ जानकारियां जुटाकर बारीकी से काम किया जाएगा।
पुलिस की इस मुहिम के तहत औरंगाबाद रेंज के औरंगबाद (ग्रामीण), जालना, बीड और ओसमानाबाद इलाके आएंगे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल जमीन विवाद और शारीरिक यातनाओं से जुड़े आपराधों में लिप्त अपराधियों को इस मुहिम के तहत चुना गया है। ऐसी ही मुहिम औरंगाबाद के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने काफी पहले चालू की थी, जिसे उन्होंने तबादले के बाद भी जारी रखा।
पुलिस के मुताबिक 175 पुलिस अधिकारियों के अलावा 1,938 सिपाहियों ने अपराधियों की काउंसलिंग का काम शुरू कर दिया है। उम्मीद है पुलिस की ये मुहिम रंग लाएगी।