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MP News:अब सीएम जनभागीदारी योजना से मोहल्लों और कॉलोनियों का विकास, भूखंड में अधिक हरियाली होने पर ग्रीन एफएआर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Tue, 24 Feb 2026 10:09 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश में अब सीएम जनभागीदारी योजना के तहत मोहल्लों की सड़क और नालियां जनता की भागीदारी से बनेंगी, जिसमें 50% खर्च सरकार और 50% स्थानीय लोग देंगे। ज्यादा हरियाली विकसित करने वाले भूखंड मालिकों को ग्रीन एफएआर का लाभ भी मिलेगा।

MP Vidhansabha: Now development will be done through CM Jan Bhagidari Yojana, Green FAR will be given if there
मध्य प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रदेश में अब मोहल्लों और कॉलोनियों की सड़कों तथा नालियों का निर्माण जनसहभागिता मॉडल पर किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे कार्यों में आधी राशि राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि स्थानीय नागरिकों के सहयोग से जुटाई जाएगी। यह राशि एकत्र करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद की होगी। इसके अलावा भूखंडों पर हरियाली ज्यादा होने पर सरकार भवन या भूखंड मालिक को अतिरिक्त निर्माण के लिए ग्रीन एफएआर मंजूरी भी दी जाएगी। विधानसभा में नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा पर वक्तव्य देते समय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश में सीएम जनभागीदारी योजना लाने की घोषणा की। इस पर विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने पूछा कि पूर्व में 75 प्रतिशत तक जनभागीदारी होती थी, तो नई योजना में कितना प्रतिशत तय किया गया है। इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार ने नई योजना तैयार की है और इसमें लचीलापन रखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि पूर्व व्यवस्था में गरीब बस्तियों से 25 प्रतिशत, निम्न एवं मध्यम वर्ग से 50 प्रतिशत और उच्च वर्ग से 25 प्रतिशत अंशदान लिया जाता था। उन्होंने कहा कि हम सभी जनप्रतिनिधियों से राय लेंगे। नगर पालिका अध्यक्ष और महापौर से पूछा जाएगा कि वे किस प्रकार की प्लानिंग जनभागीदारी से करना चाहते हैं। हम कोई योजना थोपेंगे नहीं। संबंधित नगर की क्षमता के अनुसार ही जनभागीदारी तय की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। 
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ग्रीन एफएआर का प्रावधान
मंत्री ने कहा कि उसी प्रकार हमने नगर वन योजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि जो नागरिक अपने प्लॉट में अधिक हरियाली विकसित करेंगे या ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण करेंगे, उन्हें अतिरिक्त एफएआर (तल क्षेत्र अनुमात,फ्लोर एरिया रेशियो) की सुविधा दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि जो अपने भवन और परिसर में अधिक हरियाली करेगा, उसे एफएआर में बढ़ोतरी दी जाएगी। यह शहरों में प्रदूषण कम करने की दिशा में हमारा बड़ा मिशन है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण और सतत शहरी विकास की दिशा में ग्रीन एफएआर को महत्वपूर्ण कदम बताया।

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मास्टर प्लान कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे
विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई शहरों में मास्टर प्लान वर्षों से लंबित हैं या उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। सदन में यह मुद्दा भी उठाया गया कि बिना स्पष्ट कार्ययोजना के मास्टर प्लान केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाते हैं। भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान लंबे समय से लागू नहीं हुए है। मंत्री ने कहा कि सभी प्रमुख शहरों के मास्टर प्लान चरणबद्ध तरीके से तैयार किए जा रहे हैं और जहां आवश्यक है वहां संशोधन की प्रक्रिया भी चल रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे। इनके आधार पर सड़क, पेयजल, सीवरेज और यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। 

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सेंट्रल विस्टा ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा 
विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश में इंदौर–भोपाल महानगरीय क्षेत्र (Metropolitan Area) का गठन किया जा चुका है और आने वाले समय में जबलपुर–ग्वालियर के लिए भी महानगरीय क्षेत्र घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य जारी है और “Cities for Tomorrow” की अवधारणा के तहत भविष्य के शहरों की योजना बनाई जा रही है। विजयवर्गीय ने कहा कि भोपाल में रीडेवलपमेंट के तहत विकसित किया जा रहा सेंट्रल विस्टा क्षेत्र एक बड़ा आर्थिक केंद्र बनेगा। पुराने सचिवालय के आसपास की दोनों इमारतों को ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जाएगा और इसे इंटीग्रेटेड टाउनशिप मॉडल पर तैयार किया जाएगा, ताकि प्रत्येक शहर को आर्थिक ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित किया जा सके।

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मास्टर प्लान कहां अटक गया : सिंघार
नगरीय विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों के मास्टर प्लान की घोषणा काफी समय से की जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें लागू नहीं किया गया है। सिंघार ने याद दिलाया कि नगरीय विकास मंत्री ने जून तक मास्टर प्लान जारी होने की बात कही थी, जबकि अब एक और जून आने वाला है। उन्होंने सरकार से शीघ्र मास्टर प्लान जारी करने की अपेक्षा जताई, ताकि शहरी विकास से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान हो सके।

जबलपुर में दूषित पेयजल आपूर्ति का मुद्दा उठाया
नगरीय विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने जबलपुर में दूषित पेयजल आपूर्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने गंदे पानी की बोतलें दिखाई। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है और सरकार जल गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में असफल रही है। घनघोरिया ने बताया कि 312 करोड़ रुपये की लागत से 18 पानी की टंकियों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन इसके बावजूद शहर के अनेक हिस्सों में अब तक नर्मदा जल की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि पहले विकास कार्यों को लेकर स्थानीय विधायकों से परामर्श किया जाता था, लेकिन अब अधिकारियों द्वारा एकतरफा निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जबलपुर में 4 महीने मैं 150 टेंडर हो चुके हैं, लेकिन कोई ठेकेदार टेंडर नहीं भरते, यह सोचने वाली बात है। 

मुरैना नगर निगम में सीवेज परियोजना में भ्रष्टाचार 
मुरैना से कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर ने सदन में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निगम की लापरवाही से शहरवासी नारकीय जीवन जी रहे हैं। सीवेज परियोजना को उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़ा बताया और कहा कि शहर में सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। मुंबई-आगरा मार्ग पर जाम की समस्या से लोग परेशान हैं। ओडीएफ फ्री के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि खुले में शौच की समस्या अब भी बनी हुई है और रेलवे ट्रैक तक गंदगी से भरे रहते हैं।

मेट्रो से कब्रिस्तानों की जमीन प्रभावित हो रही 
भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने सदन में आरोप लगाया कि उनकी विधानसभा की लगातार उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि पुराने शहर में न ब्रिज बने, न फ्लाईओवर, जबकि मेट्रो निर्माण से ऐतिहासिक स्थलों और कब्रिस्तानों की जमीन प्रभावित हो रही है। क्षेत्र में नाले-नालियों और स्ट्रीट लाइट तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बजट में उत्तर विधानसभा की अनदेखी का मुद्दा उठाया। अकील ने दावा किया कि इलाज के लिए भेजे गए 275 पत्रों में सिर्फ 12 स्वीकृत हुए और इसमें भी भेदभाव हुआ। सड़क, महाविद्यालय जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं तथा प्रदेश में बढ़ती हिंसक घटनाओं पर भी चिंता जताई।

 
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