जल्द ही शुरू होगा योगी का ‘ऑपरेशन मशीनरी’, इन अफसरों पर लटकी तलवार
साथ ही ऐसे अधिकारी जिनकी सपा-बसपा के साथ नजदीकी चर्चा में रही हो। अधिकारियों को हटाने या जिम्मा सौंपने का आधार सोमवार से शुरू हो रहे विभागों के प्रेजेंटेशन भी बनेंगे।
सरकार के रणनीतिकार अकारण किसी अधिकारी को हटाकर इस तरह का संदेश नहीं देना चाहते हैं कि भाजपा भी पुरानी सरकार की संस्कृति पर ही काम करने वाली है। इसीलिए नई सरकार की योजना काम और छवि को आधार बनाकर अधिकारियों के फेरबदल व तैनाती की नीति पर चलने की है।
साथ ही घोटालों की वजह से विवादों में रहे अधिकारियों को ऐसी तैनाती न देने की रणनीति है जिससे सरकार की छवि पर अंगुली उठे। दरअसल, सपा-बसपा के सत्ता में रहने के दौरान भाजपा की तरफ से समय-समय पर कुछ अधिकारियों के कामकाज को लेकर अंगुली उठाई जाती रही है।
इसी चुनाव के दौरान भाजपा ने कई अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें की थीं। बताया जाता है कि योगी सरकार के निशाने पर सबसे पहले ऐसे ही अधिकारी आने वाले हैं।
इन विभागों के अफसरों पर खास नजर
भाजपा के रणनीतिकार यह संदेश नहीं जाने देना चाहते कि अधिकारियों के खिलाफ किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर कार्रवाई की जा रही है या उन्हें प्राइम पोस्टों से हटाया गया है।
इसीलिए तय किया गया है कि ठोस आधार पर अधिकारियों को हटाया जाए या उनकी जगह नए लोगों को तैनाती दी जाए। एनआरएचएम घोटाले को लेकर चर्चा में स्वास्थ्य विभाग, भर्तियों में गड़बड़ी को लेकर विवाद में रहे सहकारिता, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, कामों में घपलों को लेकर चर्चा में रहे सिंचाई विभाग, उप्र स्टेट हाईवे अथॉरिटी (उपसा), पंजीरी घोटाले को लेकर विवाद में आए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, मायावती सरकार में हुए स्मारक घोटाला से चर्चा में आए राजकीय निर्माण निगम और लोक निर्माण विभाग तथा मनरेगा जैसे घोटालों से चर्चा में आए अधिकारियों पर सरकार की खास नजर है।
ऐसे लोगों में जो भी महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात हैं, उन्हें हटाया जाएगा। भाजपा के महामंत्री विजय बहादुर पाठक भी कहते हैं कि सरकार पूर्वाग्रह से कोई काम नहीं करेगी। तैनाती, प्रोत्साहन या दंड इन सभी का आधार संबंधित अधिकारी की छवि और क्षमता पर निर्भर करेगी।
