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UP: आईटी कंपनी में निवेश का झांसा देकर 1.12 करोड़ ठगे, व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर की गई ठगी

अमर उजाला नेटवर्क, अंबेडकरनगर Published by: ishwar ashish Updated Wed, 25 Feb 2026 07:04 PM IST
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सार

ये ठगी विप्रो इन्वेस्टमेंट पॉलिसी नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में कंपनी का लोगो इस्तेमाल किया गया और कंपनी के संस्थापक अजीम प्रेमजी के नाम का हवाला देकर निवेशकों को आकर्षक मुनाफे का भरोसा दिलाया गया। मामले में 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

UP: 1.12 crore duped by pretending to invest in IT company, fraud committed by creating WhatsApp group
- फोटो : amar ujala
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विस्तार

हंसवर में एक बड़ी आईटी कंपनी के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सुदीप वर्मा और प्रांजल वर्मा ने लोगों को प्रतिष्ठित कंपनी में निवेश का झांसा देकर 1.12 करोड़ी की ठगी की। दबाव पड़ने पर सिर्फ 82 लाख लौटाए। मंगलवार रात गिरोह के 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई है।

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अरुसा आजमपुर निवासी अविनाश पटेल के मुताबिक यह पूरा खेल 5 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ, जब मुख्य आरोपी सुदीप वर्मा और प्रांजल वर्मा ने विप्रो इन्वेस्टमेंट पॉलिसी नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में कंपनी का लोगो इस्तेमाल किया गया और कंपनी के संस्थापक अजीम प्रेमजी के नाम का हवाला देकर निवेशकों को आकर्षक मुनाफे का भरोसा दिलाया गया।
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प्रांजल वर्मा खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों का विश्वास जीतने में कामयाब रहा। सुदीप और प्रांजल ने लोगों को अपनी जीवन भर की कमाई, इन दोनों के और इनके करीबियों के विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन और नकद के माध्यम से जमा करने के लिए प्रेरित किया। यह ठगी का सिलसिला लगभग सात महीने तक चला।

सुदीप के चाचा वीरेंद्र वर्मा, जो बसखारी बैंक ऑफ बड़ौदा के पास ग्राहक सेवा केंद्र चलाते हैं, ने सुदीप का खाता खुलवाने और नकदी निकालने में मदद की। सुदीप के बड़े भाई अनूप वर्मा और प्रांजल की चाची शिल्पा वर्मा (सहायक अध्यापिका) ने मिलकर विभिन्न ग्रुपों का लेखा-जोखा रखा और रुपये की हेराफेरी की।

शिल्पा वर्मा पर आरोप है कि वह अपने जानने वाले शिक्षकों और करीबियों के खातों में रुपये मंगवाती थी और फिर उन्हें नकदी के रूप में लेकर लाखों की संपत्ति व आभूषण खरीद डाले। शिल्पा वर्मा ने अपने मायके में धोखाधड़ी के रुपये से दो पक्के मकान बनवाए हैं। फिरोज अहमद और उसके भाई शहंशाह (लेखपाल) ने भी इस ठगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

13 नवंबर 2025 को सुदीप ने सभी निवेशकों को व्हाट्सएप ग्रुप से ब्लॉक कर दिया। 14 नवंबर 2025 को जब सभी सुदीप और प्रांजल के घर पहुंचे, तो उन्होंने कबूल किया कि रुपये विप्रो कंपनी में नहीं लगाए है, बल्कि उन्होंने उसे आपस में बांट लिया है। नौ माह में इस ग्रुप के माध्यम से एक करोड़ 12 लाख 46 हजार 159 रुपये की ठगी की गई। दबाव में आरोपियों ने 82 लाख 5 हजार 836 रुपये वापस किए। अभी 30.18 लाख देने बाकी हैं और रुपये वापस मांगने पर धमकी दी जा रही है। प्रभारी निरीक्षक अभिनेष सिंह ने बताया कि एसपी के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है।

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