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कुछ जज खुद को शहंशाह समझने लगे हैं : प्रशांत भूषण

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 17 Dec 2017 03:36 PM IST
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Some judges have begun to consider themselves as emperors, says prashant bhushan
प्रशातं भूषण
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हमारा न्यायिक तंत्र देश के एक फीसदी लोगों को भी न्याय नहीं दे सकता। सरकार भी नहीं चाहती कि न्यायिक व्यवस्था दुरुस्त हो। अदालत की अवमानना के दुरुपयोग के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।

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कुछ जज खुद को शहंशाह समझने लगे हैं, वे किसी भी सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझते। ये विचार सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने शनिवार को यहां व्यक्त किए। वे ‘न्यायिक भ्रष्टाचार और लोकतंत्र’विषयक सेमिनार में मुख्य वक्ता थे।
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रिहाई मंच की ओर से आयोजित सेमिनार में प्रशांत भूषण ने कहा कि संविधान के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय सिर्फ दो पक्षों के बीच विवाद निपटाने की संस्था नहीं है। उस पर मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का भी दायित्व है।

अगर सरकार अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाती है तो न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वह सरकार को उसके कर्तव्यों का बोध कराए और उसे आगाह करे। आज कुछ न्यायाधीश ऐसी धारणा रखने लगे हैं कि वे कुछ भी करने को स्वतंत्र हैं।

स्वतंत्रता का मतलब है सरकार से स्वतंत्रता ताकि आप उस पर निगरानी रख सकें। अगर वक्त रहते न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को नहीं रोका गया तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता भी खत्म हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के माध्यम से ही देश में न्यायिक सुधार लाया जा सकता है। कार्यक्रम में पूर्व लोकायुक्त एससी वर्मा, संदीप पांडे, एडवोकेट मोहम्मद शुएब, रफत फातिमा, एमके शेरवानी भी मौजूद रहे। 

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