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शिवपाल ने कसे पेंच, चोर हैं यूपी के इंजीनियर, बख्शे नहीं जाएंगे

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 20 Apr 2016 10:44 AM IST
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shivpal singh scolds engineers in meeting
बख्शे नहीं जाएंगे चोर इंजीन‌ियर - फोटो : Demo
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पीडब्ल्यूडी एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने मंगलवार को इंजीनियरों को जमकर खरी-खरी सुनाईं। उन्होंने कहा कि कहां-क्या गड़बड़ी हो रही हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी है। 

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बनते ही सड़कें बह जाती हैं और सिल्ट-सफाई से निकली मिट्टी तक इंजीनियर बेच लेते हैं। उन्होंने सुधरने की चेतावनी देते हुए कहा कि चोरी करने वाले इंजीनियरों को बख्शा नहीं जाएगा। वे सिंचाई विभाग के सभागार में बाढ़, सूखा और विभागीय कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। 
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उन्होंने कहा कि हम जनता के बीच रहते हैं इसलिए गुणवत्ता के बारे में सब पता चल जाता है। चोरी करने वाले इंजीनियरों की उन्हें पूरी जानकारी है। उन्हें बेईमान इंजीनियरों को पकड़ना भी आता है। 

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इंजीनियर बेईमानी से बाज आएं, अन्यथा कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। नहरों की सिल्ट सफाई समय रहते करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इससे निकली मिट्टी का नहरों के किनारे ही इस्तेमाल किया जाए। 

किसानों के खेत में हर हाल में पानी पहुंचना चाहिए। अगर कोई डीएम पैसे देने से इन्कार करता है, तो उसकी जानकारी भी शासन को फौरन दें। प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल ने अभियंताओं को बिना वित्तीय स्वीकृति के कोई भी काम न कराने के निर्देश दिए। 

उन्होंने कहा कि जो पैसा जिस काम के लिए स्वीकृत हुआ है, उसी मद में खर्च होना चाहिए। अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सभी कार्यों की वीडियोग्राफी भी जरूरी है, जिसे सीडी में शासन को उपलब्ध कराना होगा।

सूखा प्रभावित जिलों में पीने के पानी के होंगे विशेष इंतजाम

shivpal singh scolds engineers in meeting
demo

उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए सूखा प्रभावित जिलों में जानवरों और आम लोगों के लिए पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। 

उन्होंने बाढ़ और सूखे से प्रभावित इलाकों को अभी से चिह्नित करने के निर्देश देते हुए कहा कि तालाबोें और जलाशयों को गहरा कराएं जिससे बारिश का पानी  स्टोर किया जा सके।

सिंचाई मंत्री ने अभियंताओं को आधुनिक तकनीक के प्रयोग करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। सभी अभियंता आधुनिक तकनीक से बने कमांड सेंटर पर बैठकर कार्यों की निगरानी करें। 

उन्होंने सभी मुख्य अभियंताओं को माह में कम से कम 10 दिन फील्ड में जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही अधूरे प्रोजेक्ट्स का संशोधित एस्टीमेट भी नाबार्ड को भेजने को कहा।

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