जहां भाजपा हारी, मैंने वही सीट चुनी: राजनाथ
लखनऊ लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजनाथ सिंह कहते हैं कि सीट च़ुनने में वह कभी भी जातीय समीकरण पर ध्यान नहीं देते हैं।
उन्होंने खुद के पीएम बनने की बात को निराधार बताते हुए कहा कि यह सिर्फ मीडिया की देन है।
बात जब लखनऊ सीट की हुई, तो उन्होंने कहा कि वह खुद कभी लखनऊ से अलग नहीं होंगे, बाकी पार्टी पर है कि वह क्या निर्णय लेती है।
जहां भाजपा हारी, मैंने वही सीट चुनी
सवाल : आप एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष हैं, लेकिन आज तक ऐसी सीट नहीं तलाश पाए जहां की नुमाइंदगी कर सकें?
जवाब : मैंने अपने लिए हमेशा ऐसी सीट चुनीं, जहां मेरी जाति का वोट निर्णायक नहीं होता। मैं मानता हूं कि सभी धर्म और जाति के लोगों को साथ लेकर चलने से ही भारत सशक्त हो सकता है।
इससे पहले (लखनऊ क्षेत्र से पहले) ऐसी सीटें ही चुनीं, जो भाजपा ने हारी थीं। मसलन, विधानसभा की हैदरगढ़ सीट हो या फिर लोकसभा की गाजियाबाद।
सीएम हमेशा अपने लिए मजबूत सीट चुनते हैं, लेकिन जब मैं सीएम था तो हैदरगढ़ जैसी कमजोर सीट अपने लिए चुनी। गाजियाबाद के तो ज्यादातर गांव में कई-कई बार गया हूं। सर्वे देख लें कि 76 फीसदी लोगों ने मुझे पसंद किया है।
पार्टी ने कहा इसलिए आया लखनऊ
सवाल : अगर इस बार लखनऊ से आपके हाथ सफलता लगी तो अगली बार फिर तो सीट नहीं बदल देंगे?
जवाब : मैंने खुद को हमेशा पार्टी के फैसले के अधीन रखा है। मैं खुद लखनऊ नहीं छोड़ूंगा, बाकी पार्टी के हाथ, जो वह कहेगी वैसा करूंगा।
सवाल : लखनऊ को ही क्यों चुना?
जवाब : मैंने नहीं चुना। मैंने तो इस सीट से नरेंद्र मोदी जी को लड़ाने के लिए कहा था। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने निर्णय लिया कि मैं सेंट्रल यूपी में लखनऊ से और मोदी जी ईस्टर्न यूपी में वाराणसी से लड़ें।
वाराणसी बिहार के नजदीक है, इसलिए मोदी जी के यहां से लड़ने का फायदा बिहार में भी निश्चित ही मिलेगा। तो पार्टी की रणनीति के तहत मैं यहां आया हूं।
मोदी ही बनेंगे प्रधानमंत्री
सवाल : पूर्व प्रधानमंत्री की सीट से नुमाइंदगी के बहाने निशाना कहीं और तो नहीं?
जवाब : पहली बात मैं पूर्व प्रधानमंत्री के फौरन बाद यहां से चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। उनके बाद लालजी टंडन लड़ चुके हैं।
दूसरी बात, मैंने स्वयं घोषित किया है कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री पद पर मेरी दावेदारी की खबरें सिर्फ मीडिया में, इनमें कोई दम नहीं है।
सवाल : शहर की कौन प्रमुख समस्याएं क्या हैं?
जवाब : ट्रैफिक जाम, सीवरेज, मलिन बस्तियां, यातायात सुविधाओं का अभाव, नवयुवकों के लिए रोजगार के अवसर न होना।
लखनऊ से है अलग तरह का अपनापन
सवाल : लखनऊ के लोग आपको क्यों चुनें?
जवाब : सन् 2001 में सीएम रहते मैंने लखनऊ के विकास के लिए एक्शन प्लान तैयार किया था।
अटलजी की सरकार में केंद्रीय परिवहन एवं सड़क मंत्रालय संभाला था, तब भी लखनऊ के विकास के लिए काफी कुछ किया।
जीतने पर वादे के मुताबिक विकास कराऊंगा। लखनऊ की पहचान बॉयोटेक सिटी के तौर पर होगी। आईटी हब बनेगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। फिर लखनऊ हमारा घर है। लंबे समय यहां काम किया है। इस शहर से अलग तरह का अपनापन है।