अगर बच्चों को पैक्ड मिल्क दे रही हैं तो जरूर पढ़ें खबर
बच्चों को गोल मटोल देखने और उनकी अच्छी सेहत के लिए घर के लोग और मां उनको पैक्ड मिल्क प्रोडक्ट्स दे रही हैं।
यह बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक है और इनके सेवन के बाद बच्चों को कई तरह की समस्या हो सकती है।
बच्चों की सेहत से खिलवाड़ न हो इसके लिए भारत सरकार का इनफैंट मिल्क सब्सट्यूट एक्ट 1992 बना है जिसके तहत जो डॉक्टर या अन्य शिशु रोग विशेषज्ञ बच्चों को ऐसे प्रोडक्ट की सलाह देते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
बाजार में बिकने वाला डिब्बा बंद दूध बच्चों की सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। भारत में 55 फीसदी बच्चों की मौतों का कारण कुपोषण हैं जिसकी वजह से शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा है।
हो सकते हैं ये नुकसान
यह जानकारी शनिवार को एक स्थानीय होटल में बेबी फूड प्रोड्क्ट्स पर आयोजित कार्यक्रम में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. केपी कुशवाहा ने दी।
उन्होंने बताया कि मां के दूध की जगह डिब्बा बंद दूध शिशु को पिलाया जाता है तो उसके भीतर कैल्शियम की कमी होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से कम होती है।
जिसकी वजह से नवजात को किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है तो उसकी हालत अधिक बिगड़ने का खतरा रहता है।
इस मौके पर यूनिसेफ के लखनऊ मंडल की रिचा पांडे ने अपील करते हुए कहा कि मां को बच्चे की सेहत को ध्यान रखते हुए अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए।
