बदायूं कांडः CBI की सुस्ती से मामला कमजोर
कटरा सआदतगंज कांड में क्लोजर रिपोर्ट की आहट महसूस की जा रही है। मामले में 90 दिन के भीतर सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करनी है। इसमें अब कुछ दिन का ही वक्त बचा है।
शुक्रवार को पांचों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पेशी के बाद पांचों आरोपियों को पांच सितंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
कटरा सआदतगंज में दो बहनों की रेप के बाद पेड़ से लटका कर हत्या के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। धारा 167 दंड प्रक्रिया संहिता में जघन्य अपराध जिसमें दस साल से उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान हो, उसमें 90 दिन में हर हालत में चार्जशीट दाखिल हो जानी चाहिए।
कोर्ट ने नहीं दी मोहलत
27/28 मई को घटना हुई और 29 मई को आरोपियों की गिरफ्तारी। यह बात अलग है कि सीबीआई को जांच के लिए 90 दिन मिले ही नहीं। सीबीआई ने मामले की 13 जून से जांच शुरू की लेकिन कोर्ट इस मामले में कोई मोहलत नहीं दे सकती।
इस मामले में यह भी खास बात है कि आरोपी जब से जेल भेजे गए हैं तब से उनकी जमानत के लिए एक भी अर्जी नहीं दी गई है। सीबीआई यह भी कह चुकी है कि वह आरोपियों की जमानत का विरोध नहीं करेगी।
सीबीआई के पास मामले में चार्जशीट दाखिल करने के लिए छह दिन ही बचे हैं। इन्हीं छह दिन में आरोपियों के भाग्य का फैसला होना है।
अगर सीबीआई ने फाइनल रिपोर्ट लगाई और पीड़ित पक्ष ने इसको स्वीकार नहीं किया तो जांच एजेंसी के पास प्रोटेस्ट के अलावा दूसरा रास्ता नहीं होगा। ऐसे में पूरे प्रकरण में क्लोजर रिपोर्ट की आहट महसूस की जा रही है।
क्या है धारा 167
अगर 24 घंटे में तफ्तीश पूरी न हो तो ऐसे गंभीर अपराध जिसमें न्यूनतम दस साल तक की सजा का प्रावधान हो चार्जशीट दाखिल करने की अवधि 90 दिन निर्धारित है।
यह धारा है एफआर की
विवेचना के दौरान अगर ऐसा प्रतीत हो कि आरोपी के विरुद्घ कोई ठोस पर्याप्त सबूत नहीं है तो मामले में क्लोजर रिपोर्ट/फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है। इसके बाद आरोपियों को बंध पत्र पर रिहा कर दिया जाता है।