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बच्चों के लिए शक्कर का ऐसा फायदा नहीं जानते होंगे आप

Updated Thu, 26 Sep 2013 11:40 AM IST
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mentally challenged children can be treated with melted sugar
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वैज्ञानिकों का कहना है कि गाढ़े तरल रूप में शक्कर का प्रयोग समय से पहले जन्मे बच्चों को मानसिक विकारों से बचा सकता है।

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शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर असमय जन्मे नवजात बच्चों के गाल के अंदरूनी हिस्से पर जेल रूप में शक्कर मली जाए तो यह उनमें मस्तिष्क संबंधी विकारों की रोकथाम का असरदार और सस्ता साधन साबित हो सकता है।

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ख़ून में शुगर का ख़तरनाक स्तर तक कम होना समय पूर्व जन्मे हर 10 में से 1 बच्चे को प्रभावित करता है। इसका इलाज ना होने पर ये बच्चे को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

न्यूज़ीलैंड के शोधकर्ताओं ने इस जेल थेरेपी का इस्तेमाल 242 बच्चों पर किया और इसके नतीजे के आधार पर कहा जा रहा है कि यह सबसे पहले अपनाया जाने वाला उपाय होना चाहिए।

शोधकर्ताओं का यह अध्ययन 'द लैंसेट' में प्रकाशित हुआ है।

शक्कर की ख़ुराक
ऑकलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेन हार्डिंग और उनकी टीम का कहना है कि डेक्सट्रॉस जेल से किया जाने वाला इलाज काफ़ी सस्ता पड़ता है (तकरीबन 1 पाउंड प्रतिदिन)। साथ ही ड्रिप से दिए जाने वाले ग्लूकोज़ के बजाय इसका इस्तेमाल आसान है।

वर्तमान में जो इलाज किया जाता है उसमें अतिरिक्त ख़ुराक औऱ क्लिक करें शुगर स्तर का पता लगाने के लिए ख़ून की बार बार जांच करना शामिल है।

हालांकि हाइपोग्लाइकेमिया से जूझ रहे बच्चों को सघन चिकित्सा में रखा जाता है और उन्हें नसों के ज़रिए ग्लूकोज़ दिया जाता है क्योंकि उनका शुगर स्तर लगातार कम बना रहता है।

ये अध्ययन इस बात का मूल्यांकन करता है कि क्या हाइपोग्लाइकेमिया से निपटने के लिए डेक्सट्रॉस जेल का इस्तेमाल ज़्यादा असरदार साबित हो सकता है।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के महिला स्वास्थ्य संस्थान के नील मार्लो का कहना है कि डेक्सट्रॉस जेल का इस्तेमाल बंद हो चुका है लेकिन इन खोजों से पता चलता है कि इसे इलाज के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

इस बात के काफ़ी बेहतर सुबूत हैं कि ये बेहद क़ीमती है।

समय पूर्व जन्मे बच्चों के हितार्थ काम करने वाली संस्था ‘ब्लिस’ के मुख्य कार्यकारी ऐंडी कोल कहते हैं कि ‘‘यह नया शोध काफ़ी दिलचस्प है। हम हमेशा ऐसी हर चीज़ का स्वागत करने के लिए तैयार रहते हैं जो असमय जन्मे या बीमार बच्चों से संबंध रखती है।’’

यह एक सस्ता इलाज है और आईसीयू में जाने वाले बच्चों की संख्या कम कर सकता है जो पहले से ही बहुत ज़्यादा इलाज कर रहे हैं।

हालांकि शोध के शुरूआती नतीजे कम शुगर स्तर के साथ जन्मे बच्चों के लिए फ़ायदेमंद साबित हुए हैं लेकिन ये साफ़ है कि इस इलाज को हक़ीक़त में अपनाने के लिए अभी और शोध करना होगा।

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