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आपमें कहीं विटामिन-डी की कमी तो नहीं !
फीचर डेस्क/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 17 Sep 2013 05:51 PM IST
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कई बार शरीर में किसी एक पोषक तत्व की कमी भी कई बीमारियों का कारण बन जाती है। इस मामले में विटामिन-डी इसलिए अहम है क्योंकि हमारी जीवनशैली इसके सबसे बड़े स्रोत यानी सूरज के प्रकाश से हमें दूर करती जा रही है। इसका सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
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क्या है विटामिन-डी
विटामिन-डी वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन्स का एक समूह होता है। यह एक स्टेरॉइड (खास रासायनिक) विटामिन है, जो आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुंचाता है।
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शरीर में इसका निर्माण हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावॉयलेट किरणों की मदद से होता है। इसके अलावा शरीर में रसायन कोलिकल कैसिरॉल पाया जाता है, जो खाने के साथ मिलकर विटामिन-डी बनाता है।
विटामिन-डी पांच प्रकार का होता है -विटामिन-डी1, विटामिन-डी2, विटामिन-डी3, विटामिन-डी4 और विटामिन-डी5। मानव शरीर के लिए विटामिन-डी2 और डी-3 बेहद जरूरी हैं।
दुनिया भर में फैलता खतरा
यदि आप प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट का समय सूरज के प्रकाश में नहीं रहते हैं तो यह विटामिन-डी की कमी पैदा कर सकता है।
दुनिया भर में लगभग एक बिलियन लोग विटामिन-डी की कमी से ग्रस्त हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान किए गए शोध बताते हैं कि विटामिन-डी कई बीमारियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है।
इसी वजह से विटामिन-डी की कमी कई गंभीर बीमारियों को दावत दे देती है, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, कैंसर, मल्टीपल स्केलरोसिस और इंफेक्शन से जुड़ी बीमारियां जैसे ट्यूबरोकुलोसिस या फिर मौसमी बुखार।
विटामिन-डी टेस्ट
यह टेस्ट मुख्यतः 25 हाइड्रॉक्सी विटामिन-डी के रूप में किया जाता है, जो कि विटामिन-डी मापने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
इसके लिए रक्त का नमूना नस से लिया जाता है और एलिसा या कैलिल्टूमिसेंसनस तकनीक से टेस्ट लगाया जाता है। विटामिन-डी अन्य विटामिनों से भिन्न है।
यह हारमोन सूर्य की किरणों के प्रभाव से त्वचा द्वारा उत्पादित होता है। विटामिन-डी के उत्पादन के लिए गोरी त्वचा को 20 मिनट धूप की जरूरत होती है और गहरे रंग की त्वचा के लिए इससे कुछ अधिक समय की जरूरत होती है।
विटामिन-डी की कमी के विभिन्न स्तर
अपर्याप्त 20-40 एमजी/एमएल
न्यून 10-20 एमजी/एमएल
न्यूनतम 5 मिलीग्राम/प्रति मिलीलीटर से भी कम
लक्षण
थकान महसूस होना।
बच्चों की हड्डियों का टेढ़ा हो जाना।
हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द रहना।
कमर में अक्सर दर्द की शिकायत रहना।
इनका करें सेवन
फोर्टीफाइड डेयरी प्रोडक्ट
सोया प्रोडक्ट
मशरूम
अंडा
कॉडलीवर ऑयल
मछली
क्यों जरूरी है
- इम्यून सिस्टम को नियमित रखता है।
- यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो डेनवर स्कूल ऑफ मेडिसिन, मैसाच्युसेट्स जनरल हॉस्पिटल और बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों के मुताबिक सर्दी, जुकाम के लक्षणों को दूर करने में भी यह कारगर है।
- अमेरिका की ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोइम्यूनोलॉजी सेंटर में चेयरमैन डेनिस बोरडे के अनुसार यह मल्टीपल स्केलरोसिस के खतरे को भी कम करता है।
- एक शोध के मुताबिक विटामिन-डी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सुचारु रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
- जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेज में किए गए एक शोध की मानें तो शरीर के वजन को संतुलित रखने में भी इसकी अहम भूमिका है।
- अस्थमा के लक्षणों को कम करने में भी विटामिन-डी लाभदायक है।
- 2012 में सामने आई प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा ट्यूबरोकुलोसिस के मरीजों को जल्द राहत देने में कारगर है।