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भस्म-प्राण: शून्योदय

                
                                                         
                            द्युतिसिक्त अंबर, स्मितमुख धरा, मौन-शून्यापार,
                                                                 
                            
ग्रीष्मनटी-मंदचरण, तप्तप्रलय-शृंगार।

अणुकम्पन, ऊष्मस्पंदन, विलीनध्रुव नीहार,
विज्ञानदृष्टि-सिक्तव्योम, कालवेग हुंकार।

शोषपल्लव, मृगमरीचिका, असत संसारसार,
दग्धशून्य-खचितसत्व, दार्शनिकपरिहास प्रहार।

तप्तत्रिवेणी, स्वर्णदिशा, भस्मसृष्टि प्रवाह,
काच-द्विप्रहर, कालजेता, द्युतिरेखा अवगाह।

बिनमेघ-वृष्टि, बिनपद-गति, सृजनबोधाकार,
शुष्कहृदय-अंतसरस, अनाहतोद्गार।

अहंभस्म-ज्ञानबोध, मुक्तबुद्ध अन्न-विपन्न,
दग्ध-काया, कंचनस्वर्ण, कुत्याग शुद्धाभिन्न।

शून्योदय, शून्यलय, अद्वैतज्योति अधीन,
तप्तात्म, शिवमौनमय, कालभ्रम विहीन।
-सनातन मुकुंद
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11 घंटे पहले

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