मालूम है आंधियों को भी कि किसका घर उजाड़ना है,
तभी तो तेज़ तूफ़ां में भी परिंदों का आशियां सलामत है।
झुक जाती हैं हवाएं भी देखकर ये हौसला तिनकों का,
वरना तबाही के मंज़र में किसका यहाँ जहाँ सलामत है।
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