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शायर परिहार साहेब

                
                                                         
                            कहने को आजाद पंछी हैं
                                                                 
                            
पर हर दाने की दूसरों से आस हैं,
हम अपने दम पर माप लेंगे पूरा आसमान
क्योंकि हमें खुद से ज्यादा आपने पंखों पर विश्वास हैं।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 घंटे पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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