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दिलावर फ़िगार का मज़ाहिया कलाम: वस्ल की रात जो महबूब कहे गुड नाईट

हास्य
                
                                                         
                            ज़हर बीमार को मुर्दे को दवा दी जाए
                                                                 
                            
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए

वस्ल की रात जो महबूब कहे गुड नाईट
क़ाएदा ये है कि इंग्लिश में दुआ दी जाए

आज जलसे हैं बहुत शहर में लीडर कम हैं
एहतियातन मुझे तक़रीर रटा दी जाए

मार खाने से मुझे आर नहीं है लेकिन
पिट चुकूँ मैं तो कोई वज्ह बता दी जाए

मेरी वहशत की ख़बर घर को हुई है जब से
छत ये कहती है कि दीवार हटा दी जाए

बस में बैठी है मिरे पास जो इक ज़ोहरा-जबीं
मर्द निकलेगी अगर ज़ुल्फ़ मुँडा दी जाए

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1 hour ago

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