{"_id":"6993a0d128591019460c15a5","slug":"solar-eclipse-first-of-the-year-today-ring-of-fire-not-visible-in-india-2026-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solar eclipse: साल का पहला सूर्य ग्रहण आज, भारत में नहीं दिखेगा रिंग ऑफ फायर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Solar eclipse: साल का पहला सूर्य ग्रहण आज, भारत में नहीं दिखेगा रिंग ऑफ फायर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 17 Feb 2026 04:27 AM IST
विज्ञापन
सार
Solar eclipse: साल 2026 का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा, जिसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है और यह भारतीय समयानुसार दोपहर 12:31 बजे शुरू होगा। यह दुर्लभ खगोलीय घटना दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देगी, जबकि भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे होने के कारण इसके दर्शन संभव नहीं होंगे। पढ़ें रिपोर्ट-
सूर्य ग्रहण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन
विस्तार
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी को लगेगा। यह एक विशेष प्रकार का चक्राकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे आम भाषा में रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 12:31 बजे शुरू होगा और लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक चलेगा। हालांकि यह दुर्लभ खगोलीय घटना दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देगी, भारत में इसके दर्शन संभव नहीं होंगे क्योंकि उस समय सूर्य भारतीय क्षितिज के नीचे रहेगा।
यह ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। नासा के अनुसार, इस समय चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी वजह से वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप चंद्रमा एक छोटे काले डिस्क की तरह दिखाई देता है और उसके चारों ओर सूर्य का चमकदार घेरा बन जाता है। यही चमकता हुआ छल्ला रिंग ऑफ फायर कहलाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के केंद्र का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक देगा, लेकिन किनारों पर सूर्य की तेज रोशनी बनी रहेगी। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसका कारण यह है कि यह खगोलीय घटना दक्षिणी गोलार्ध में घटित होगी और उस समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा। इसी वजह से देश के किसी भी हिस्से से इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।
ऑनलाइन देखा जा सकेगा नजारा
खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग इसे अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं और स्पेस एजेंसियों की लाइव स्ट्रीम और वीडियो प्रसारण के माध्यम से देख सकेंगे। साल 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए एक अहम अवसर माना जा रहा है। रिंग ऑफ फायर का दृश्य भले ही दुनिया के चुनिंदा हिस्सों तक सीमित रहेगा, लेकिन यह घटना हमारे सौरमंडल की जटिल गतिशीलता और प्रकृति के अद्भुत संतुलन की याद दिलाती है। पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा का यह दुर्लभ संयोग हर बार ब्रह्मांड की विशालता और सुंदरता को नए सिरे से समझने का मौका देता है।
ये भी पढ़ें: Macron India Visit: मुंबई पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, पीएम मोदी के साथ आज करेंगे द्विपक्षीय वार्ता
यहां दिखेगा सूर्य ग्रहण
इस ग्रहण का सबसे अच्छा दृश्य अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा, खास तौर पर वहां स्थित कॉनकॉर्डिया और मिर्नी अनुसंधान केंद्रों के आसपास। इसके अलावा दक्षिणी अफ्रीकी क्षेत्रों में इसे आंशिक रूप से देखा जा सकेगा, जिनमें दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, विशेषकर अर्जेंटीना और चिली में भी यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा।
Trending Videos
यह ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। नासा के अनुसार, इस समय चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी वजह से वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप चंद्रमा एक छोटे काले डिस्क की तरह दिखाई देता है और उसके चारों ओर सूर्य का चमकदार घेरा बन जाता है। यही चमकता हुआ छल्ला रिंग ऑफ फायर कहलाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के केंद्र का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा ढक देगा, लेकिन किनारों पर सूर्य की तेज रोशनी बनी रहेगी। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसका कारण यह है कि यह खगोलीय घटना दक्षिणी गोलार्ध में घटित होगी और उस समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा। इसी वजह से देश के किसी भी हिस्से से इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऑनलाइन देखा जा सकेगा नजारा
खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग इसे अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं और स्पेस एजेंसियों की लाइव स्ट्रीम और वीडियो प्रसारण के माध्यम से देख सकेंगे। साल 2026 का यह पहला सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए एक अहम अवसर माना जा रहा है। रिंग ऑफ फायर का दृश्य भले ही दुनिया के चुनिंदा हिस्सों तक सीमित रहेगा, लेकिन यह घटना हमारे सौरमंडल की जटिल गतिशीलता और प्रकृति के अद्भुत संतुलन की याद दिलाती है। पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा का यह दुर्लभ संयोग हर बार ब्रह्मांड की विशालता और सुंदरता को नए सिरे से समझने का मौका देता है।
ये भी पढ़ें: Macron India Visit: मुंबई पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, पीएम मोदी के साथ आज करेंगे द्विपक्षीय वार्ता
यहां दिखेगा सूर्य ग्रहण
इस ग्रहण का सबसे अच्छा दृश्य अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा, खास तौर पर वहां स्थित कॉनकॉर्डिया और मिर्नी अनुसंधान केंद्रों के आसपास। इसके अलावा दक्षिणी अफ्रीकी क्षेत्रों में इसे आंशिक रूप से देखा जा सकेगा, जिनमें दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, विशेषकर अर्जेंटीना और चिली में भी यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा।