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एनएमसी बिल के विरोध में PGI डॉक्टर्स की हड़ताल, बिना इलाज करीब छह हजार मरीज लौटे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 04 Aug 2019 11:30 AM IST
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Strike In Chandigarh PGI
बिना इलाज लौटे मरीज - फोटो : अमर उजाला
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पीजीआई की न्यू ओपीडी में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से करीब छह हजार मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। इस दौरान कई डिपार्टमेंट के डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे मगर मरीजों को अंदर जाने नहीं दिया गया। न्यू ओपीडी में न्यूरो सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, फिजियोथैरेपी व हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट के डाक्टर पहुंचे और वे मरीज का इंतजार करते रहे। 

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पहले तो उन मरीजों को भी रोका गया, जिनके टेस्ट होने थे। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया। डे केयर सेंटर में जिन मरीजों को कीमो लगनी थी, उन मरीजों को भी ओपीडी में जाने की अनुमति दे दी गई। इस दौरान दूरदराज से आए मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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उनकी एक भी नहीं सुनी गई। रेजिडेंट की हड़ताल के बाद पीजीआई ओपीडी पूरी तरह से बंद कर दी थी। लेकिन कई मरीजों को सूचना नहीं मिल पाई और उन्हें पीजीआई आना पड़ा। लोगों का कहना था कि यदि अंदर फैकल्टी बैठी है तो उन्हें अंदर जाने दिया जाए।

इससे कुछ मरीजों को लाभ मिलेगा। मेन गेट को छोड़कर सभी ओपीडी के गेट को बंद करके रखा गया था। मेन गेट खुला था लेकिन वहां सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे जो मरीजों को अंदर नहीं जाने दे रहे थे। इस दौरान मरीजों ने हंगामा भी किया और उनकी सुरक्षाकर्मियों से झड़प भी हुई।

हड़ताल से सबसे ज्यादा प्लान सर्जरी प्रभावित हुई। पीजीआई के मुताबिक एक दिन कुल 170-180 सर्जरी होती हैं। इनमें प्लान सर्जरी 100-125 होती हैं, जबकि बाकी नॉन प्लान व इमरजेंसी सर्जरी होती है। इमरजेंसी सर्जरी में कोई भी रुकावट नहीं थी। सिर्फ प्लान सर्जरी पर खतरा ज्यादा था।

शनिवार को सिर्फ 30 ही प्लान सर्जरी हो पाईं। जिनकी सर्जरी टाली गई हैं, उन्हें बाद में तारीख दी जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि उन सर्जरी को तवज्जो दी गई है, जो पेशेंट गंभीर थे। जिन मरीजों को टाला जा सकता है, उन्हें ही लौटाया गया है।

नेशनल मेडिकल कमिशन बिल का विरोध कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि यदि इस बिल में संशोधन नहीं किए गए तो वे कड़ा रुख अपना लेंगे। रेजिडेंट डॉक्टर के प्रेसिडेंट डॉ उत्तम ठाकुर ने बताया कि अभी तो सिर्फ ओपीडी सेवाएं रोकी गईं हैं। यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो इमरजेंसी, आईसीयू व ट्रामा सेंटर के सेवाएं भी रोक देंगे और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

अब तक तय नहीं हो पाया कि रेजिडेंट डॉक्टर कब तक हड़ताल पर रहेंगे। पीजीआई प्रशासन की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश की गई है, लेकिन वे तैयार नहीं हुए।

पीजीआई प्रशासन का कहना है कि दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। ऐसे में यहां के भी रेजिडेंट डॉक्टरों को हड़ताल वापस ले लेनी चाहिए। लेकिन सोमवार को ओपीडी खुलेगी या नहीं। इसके बारे में रविवार शाम को ही पता चल पाएगा।

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