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Hisar News: बिजली चोरी में अनिल दोषी करार, तीन गुना जुर्माना
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हिसार। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंगलेश कुमार चौबे की अदालत ने मंगलवार को बिजली चोरी के मामले में गांव दुर्जनपुर निवासी अनिल को दोषी करार देते हुए तीन गुना जुर्माना लगाया है। यह मामला थाना इरिगेशन एंड पावर में 2 अक्टूबर 2020 को दर्ज एफआईआर से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 25 सितंबर 2020 को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की टीम ने आरोपी के घर पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान बिजली चोरी पकड़ी गई और मौके पर एलएल-1 रिपोर्ट तैयार की गई। टीम ने वहां से 10 एमएम की तार भी बरामद की थी। विभाग की ओर से 1,491 रुपये का नुकसान आंका गया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि संबंधित बिजली मीटर आरोपी के पिता जिले सिंह के नाम पर है तथा छापे के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। वहीं अभियोजन पक्ष ने एलएल-1 रिपोर्ट पर आरोपी के हस्ताक्षर, आकलन राशि जमा करवाने तथा गांव के नंबरदार के बयान को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध किए।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आकलन राशि जमा करना और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना इस बात का प्रमाण है कि आरोपी बिजली का उपयोगकर्ता था। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत अपराध सिद्ध माना। सजा निर्धारण के दौरान अदालत ने आरोपी की आर्थिक स्थिति और मुकदमे की लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए नरमी बरती तथा पहले से जमा राशि को समायोजित करते हुए 4,473 रुपये का जुर्माना लगाकर मामले का निपटारा कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 25 सितंबर 2020 को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की टीम ने आरोपी के घर पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान बिजली चोरी पकड़ी गई और मौके पर एलएल-1 रिपोर्ट तैयार की गई। टीम ने वहां से 10 एमएम की तार भी बरामद की थी। विभाग की ओर से 1,491 रुपये का नुकसान आंका गया था।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि संबंधित बिजली मीटर आरोपी के पिता जिले सिंह के नाम पर है तथा छापे के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। वहीं अभियोजन पक्ष ने एलएल-1 रिपोर्ट पर आरोपी के हस्ताक्षर, आकलन राशि जमा करवाने तथा गांव के नंबरदार के बयान को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध किए।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आकलन राशि जमा करना और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना इस बात का प्रमाण है कि आरोपी बिजली का उपयोगकर्ता था। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत अपराध सिद्ध माना। सजा निर्धारण के दौरान अदालत ने आरोपी की आर्थिक स्थिति और मुकदमे की लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए नरमी बरती तथा पहले से जमा राशि को समायोजित करते हुए 4,473 रुपये का जुर्माना लगाकर मामले का निपटारा कर दिया।